Ranchi : रांची की हलचल भरी सड़कों पर एक चौराहा, शोर, गाड़ियां, हॉर्न और उस सबके बीच एक नन्हा बालक ‘चिंटू’, अपने दद्दू का हाथ थामे खड़ा था। सामने ट्रैफिक सिग्नल की लाल बत्ती चमक रही थी और सभी गाड़ियां जैसे किसी अदृश्य जादू के असर में थम गई थीं। चिंटू (आश्चर्य से): “दद्दू… ये लाल बत्ती सबको रोक देती है, लाल बत्ती लगी अस्पताल की गाड़ियों, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की गाड़ियों, कुछ वीआईपी गाड़ियों के दिखते ही शेष गाड़ियों को रोककर उन्हें पहले भेजा जाता है। अस्पतालों में भी ऑपरेशन रूम के बाहर लाल बत्तियां जलती दिखती हैं। तेज रफ्तार से भागती ट्रेन भी लाल सिग्नल पर रुक जाती हैं। आसमान में उड़ते हवाई जहाजों में रात के समय लाल रंग की बत्तियां जलती दिखती हैं, इतनी ताकत इस रंग में कैसे है?” दद्दू मुस्कराये, झुके और बोले, “बिलकुल वैसे ही बेटा, जैसे मां की एक तीखी निगाह बचपन में हमारी शरारतें थमा देती थी, ये लाल रंग भी दुनियाभर को सतर्क कर देता है।”
चिंटू: “पर दद्दू, ये रंग ही क्यों? नीला, पीला या हरा क्यों नहीं?” दद्दू (आंखें दूर कहीं अतीत में गड़ाये) “क्योंकि लाल रंग वो है जिसे सबसे पहले और सबसे दूर से देखा जा सकता है। इसका दिल धड़काने वाला असर होता है, जैसे खतरे की घंटी बजने से पहले दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं।” “ये रंग कम बिखरता है, कोहरे, बारिश या धूल में भी साफ चमकता है, जैसे मां का आंचल तमाम मुश्किलों के बीच भी हमें रास्ता दिखाता है। लाल रंग आसानी से ध्यान खींचता है। लाल रंग की तरंग दैर्ध्य (wavelength) अधिक करीब 620 से 750 एमएम होती है, इसका अर्थ यह है कि यह वायुमंडलीय कणों (जैसे जल की बूंदें, धूल आदि) के साथ कम सम्पर्क कर पाता है। ” चिंटू: “तो लाल रंग डराता है?” दद्दू (मुस्कुराते हुये): “नहीं बेटे… ये डर नहीं देता, चेतावनी देता है। ये कहता है, ‘रुको, सोचो, फिर आगे बढ़ो।’ जैसे जिंदगी के मोड़ पर कोई हमें रोककर कहे, ‘थोड़ा रुक जाओ बेटा, यह वक्त सोचने का है, भागने का नहीं।’ कई जहरीले पशुओं, कीटों, सर्पों और पौधों में भी लाल या चटक रंग होते हैं, जो एक चेतावनी का संकेत देते हैं, ‘मुझे मत छूओ’। चिंटू अब उस लाल बत्ती को नये अंदाज में देख रहा था। वो महज एक सिग्नल नहीं थी, वो जैसे एक संकेत थी जिंदगी के धैर्य की, सावधानी की और समझ की। दद्दू ने अंतिम वाक्य में कहा, “कभी-कभी जिंदगी भी हमें एक लाल बत्ती दिखाती है बेटा, रोकती है, सिखाती है, और जब हम सीख लें तो फिर हरा सिग्नल खुद जल उठता है…”
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