Ranchi : आज सुबह नगड़ी के साहेर पंचायत की गलियों में एक अजीब सी हलचल थी। अजय नायक की पत्नी ने अपनी पुरानी टीन की छत को अंतिम बार छुआ, जैसे वर्षों पुरानी स्मृति को विदा दे रही हो। बगल की बुज़ुर्ग दादी बुदबुदाईं, “बेटा, सरकार सपने भी पूरे करती है क्या?” अजय ने मुस्कुरा कर कहा, “आज हमारे लिये सरकार घर बनकर आई है, दादी।”
जब DC खुद चाबी लेकर पहुंचे
साहेर पंचायत के मैदान में जैसे कोई उत्सव हो रहा था। DC मंजूनाथ भजन्त्री जब हाथ में चाबी लिये अजय नायक के दरवाजे तक पहुंचे, तो भीड़ में खड़ी महिलाएं रोने लगीं, “हमलोगों के नसीब में ऐसा दिन भी होगा, सोच नहीं सकते थे।”
गृह प्रवेश के समय जैसे हर ईंट ने गवाही दी, “हम खपरैल से उठकर इज्जत का मकान बने हैं…” तब अजय के मुख से हौले से बस इतना ही निकला, बहुत खुश हैं हुजूर, सोचे भी नहीं थे कि अपना घर बना पायेंगे, लेकिन सरकार ने ये सपना भी पूरा कर दिया। पहले हमलोगों का खपरैल घर था, सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में जो कैंप लगा था, उसमें फॉर्म भरे थे, अब अपना घर मिल गया है। सबको बहुत-बहुत धन्यवाद। भला हो CM हेमंत सोरेन का। नगड़ी से लेकर नामकुम, सिल्ली से सोनाहातू तक 3533 परिवारों ने उस दिन सिर्फ दरवाजा नहीं खोला, बल्कि “अपना हक” खोला। खाता-किस्त और योजना के जटिल शब्द उस दिन आशीर्वाद बन चुके थे। खुशियों की परछाइयों में एक आवाज गूंजती रही, “अब अपने घर में हैं, अबुआ घर… अबुआ जिंदगी…”
जब महिलाएं बोलीं, अब हम सहारा नहीं, सहारा देंगी
कार्यक्रम में जब महिलाओं ने मंच पर कहा, “ढाई हजार नहीं, ये आत्मविश्वास है। ” तो DC मंजूनाथ भजन्त्री ने मुस्कुराते हुये कहा कि “अब तुम्हारा घर है, तो जिम्मेदारी भी तुम्हारी, उड़ना है तो आसमान भी तुम्हारा है…” मंच के अंत में जब DC ने नंबर बताया 9430328080 तो गांव की महिलाओं ने अपनी चुनरी के कोने में वो नंबर बांध लिया, “कभी भी जरूरत पड़े, अबुआ साथी तक पहुंच है…”
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