मच्छर गायब हो जाए तो क्या होगा? इन पर पड़ सकता है बुरा असर

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Kohramlive desk : रात में सोते वक्त जब मच्छर हमें काटते हैं, कान के पास भिनभिनाते है तो हर किसी के मन में सबसे पहले यही आता है कि इन मच्छरों को कैसे खत्म किया जाए? हर इंसान मच्छर से परेशान रहता हैं, इसके लिए तरह-तरह के उपाय करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर दुनिया के सारे Mosquito अचानक गायब हो जाएं तो क्या होगा? क्या मच्छरों के ना होने से इस धरती पर कोई असर पड़ेगा?  इससे पहले जानते हैं कि Mosquito  होता क्या है?

मच्छर की 3500 प्रजातियां

मच्छर कीड़ों की एक बड़ी प्रजाति है। इन्हें फ्लाय यानी उड़ने वाले कीड़ों की श्रेणी में रखा जाता है। मच्छरों के सिर्फ 2 पंख होते हैं। वैसे तो कई फ्लाय कीड़े होते हैं, जो काटने वाले होते हैं। लेकिन ये दूसरे प्राणी का खून चूसकर पनपते हैं।  मच्छरों की करीब 3500 प्रजातियां दुनिया में पाई जाती हैं और वो सब एक दूसरे से काफी अलग होते हैं। कुछ रात के वक्त ज्यादा एक्टिव रहते हैं, वहीं कुछ दिन के वक्त।  सिर्फ मादा मच्छर ही इंसानों का खून चूसती है क्योंकि उसी के जरिए वो अंडे दे सकती है।

 जानलेवा बीमारियां

वहीं नर मच्छर जिंदा रहने के लिए फूलों का रस चूसते हैं। अगर मादा मच्छर ने किसी ऐसे इंसान या जानवर का खून चूस लिया जिसे कोई भयंकर बीमारी या शरीर में वायरस है तो उसके बाद जब मादा मच्छर दूसरे इंसान को काटेगी तो वो वायरस को फैला सकती है। लेकिन इन मच्छरों की प्रजातियों में केवल ऐसी 40 प्रजातियों की मादाएं होती हैं जो बेहद खतरनाक होती हैं। जिनके काटने से मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियां हो जाती हैं।

अगर मच्छर नहीं रहे तो क्या होगा?

अब इस सवाल पर आते हैं कि अगर मच्छर गायब हो गए तो क्या होगा? जैसा हमने बताया कि कुछ ही प्रजाति के मच्छर खतरनाक होते हैं। ऐसे में अगर ये प्रजातियां गायब होती हैं तो इंसान स्वस्थ जीवन बिता सकता है लेकिन अगर बात करें सभी मच्छरों के गायब हो जाने की तो उससे पर्यावरण और इकोसिस्टम का संतुलन बिगड़ सकता है।

आइए जानते हैं कैसे-

बहुत से जीव होते हैं जो इन इन मच्छरों को खाते हैं।  जैसे- मेंढक, ड्रैगन फ्लाय, चींटी, मकड़ी, छिपकलियां, चमगादड़ आदि। अगर मच्छर गायब हो जाएं तो कई जीवों के पास खाने के लिए काफी कम खाना बचेगा, जिससे उनका अस्तित्व खत्म हो सकता है। मच्छरों के ना होने से परागण खत्म हो जाएगा। परागण की प्रक्रिया के तहत मच्छर पौधों के पराग लेकर अलग-अलग जगह गिराते चलते हैं, जिससे नए पौधे अलग जगहों पर उगते हैं।

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