Kohramlive : धरती के गहराई में कुछ ऐसा घट रहा है, जिसे सुनकर विज्ञान भी सिहर उठा है। पूर्वी अफ्रीका की धरती अब अपने ही सीने में दरारें महसूस कर रही है, ऐसी दरारें जो धीरे-धीरे उसे दो हिस्सों में बांट देंगी। इस विभाजन की कोख से जन्म लेगा एक नया महासागर। उत्तर से दक्षिण तक लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी ग्रेट रिफ्ट वैली अब धरती की सबसे जीवंत प्रयोगशाला बन चुकी है। यहीं, धरती की परतें, सोमालियन, अफ्रीकन और अरेबियन प्लेटें, एक-दूसरे से धीरे-धीरे जुदा हो रही हैं। धरती की गहराई से उठती गर्म मैग्मा की सांसें इस प्रक्रिया को और तेज कर रही हैं। ऐसा लगता है मानो पृथ्वी खुद को नया रूप देने के लिये भीतर से उबल रही हो।
भू-वैज्ञानिक डॉ. रोसालिया नेवे बताती हैं कि हर साल सोमालियन प्लेट कुछ मिलीमीटर पूर्व की ओर सरक रही है। यह हलचल छोटी जरूर है, पर यही छोटे-छोटे कदम भविष्य में एक विशाल बदलाव की नींव रख रहे हैं। कई सौ वर्षों बाद जब यह खिंचाव चरम पर पहुंचेगा, तो अफार क्षेत्र से लेकर केन्या और तंजानिया की सीमाओं के बीच एक नया सागर जन्म लेगा। वैज्ञानिकों का कहना है, वह दिन आयेगा जब अफ्रीका का एक हिस्सा अलग होकर “हॉर्न ऑफ अफ्रीका” नाम से एक विशाल द्वीप बन जायेगा। यह घटना इंसान की आंखों के सामने धरती के इतिहास का सबसे बड़ा परिवर्तन होगी। कल्पना कीजिये, जब एक नया महासागर जन्म लेगा, जब एक महाद्वीप दो हिस्सों में बंटेगा और जब मानव सभ्यता अपनी आंखों से देखेगी, धरती को खुद को फिर से गढ़ते हुये।









