Ranchi : दुमका की बिटिया अंकिता मर्डर केस से दुखी गर्वनर रमेश बैस ने कहा कि एक लड़की जिसने अभी पूरी दुनिया भी नहीं देखी थी, उस इस तरह से अंत बहुत ही पीड़ादायक है। गर्वनर ने मारी गई अंकिता के पिता संजीव से बातें कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। वहीं वे पीड़ित परिवार को अपने विवेकाधीन अनुदान मद से 2 लाख रुपये देंगे। गर्वनर रमेश बैस ने चीफ सेक्रेटरी सुखदेव सिंह और डीजीपी नीरज सिन्हा से बातें की। गर्वनर ने कहा कि इस तरह की जघन्य व पीड़ादायी घटना राज्य के लिए शर्मनाक है। ऐसी घटनाओं से राज्य की छवि पर विपरीत असर पड़ता है। प्रदेश की जनता घर, दुकान, मॉल, सड़क कहीं भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। गर्वनर ने कहा कि उनके द्वारा पूर्व में भी डीजीपी को तलब कर राज्य की विधि-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए इसे प्रभावी व दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं दिख रहा है। उन्होंने डीजीपी से आज पुनः बात कर अंकिता की मौत के मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका की जांच करने का आदेश दिया। राज्यपाल ने इस घटना की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने की भी बात कही।
वहीं अंकिता मर्डर केस से आहत और मर्माहत युवा CM हेमंत सोरेन ने कहा कि गुनाहगारों को जल्द से जल्द सजा मिले, इसपर सरकार का जोर है। इस तरह की घटना का समाज में कोई स्थान नहीं है। ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करना चाहिये। कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिये। घटना से दुखी CM सोरेन ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये बतौर मुआवजा दिया। CM सोरेन ने पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी है। एडीजी अभियान मुरारी लाल मीणा एवं CID के IG असीम विक्रांत मिंज को दुमका भेजा गया है। अनुसंधान में कोई चूक नहीं हो, इसका पूरा ध्यान रखने को कहा गया है। गर्वनर और सीएम के आदेश के बाद एक्शन मोड में आई पुलिस ने अंकिता कांड के दूसरे गुनाहगार नईम उर्फ छोटू खान को भी गिरफ्तार कर लिया है। छोटू पर इल्जाम है कि उसने ही अंकिता को जलाने के लिये पेट्रोल लाकर सनकी सिरफिरे शाहरूख को दिया था।
डीजीपी नीरज सिन्हा और आईजी अभियान अमोल वेणुकांत होमकर पूरे घटनाक्रम पर खुद नजर रखें हुये हैं। वे पल पल की जानकारी अपने मातहत अधिकारियों से ले रहे हैं। इधर, आज पुलिस की कड़ी पहरेदारी में अंकिता सिंह की अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर चेहरे पर गम और गुस्सा था। जनाक्रोश उबाल पर है। घटना से आहत दुमका में बंद सा नजारा रहा। तमाम दुकाने, हाट और बाजार बंद रहे।
बेटी खोने वाले पिता संजीव ने कहा कि वह गुनाहगार को फांसी पर लटकता देखना चाहते हैं। उनके लिये फांसी की सजा भी कम है। बेटी ने रात में बताया था सबकुछ, उसे बोले थे ठीक है, बेटा सुबह उससे बात करने जायेंगे, पर इससे पहले ही शाहरूख ने उनकी बेटी का जिंदा जला दिया। वह तड़प-तड़प कर मरी है।
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