Hazaribagh (Sunil Sahu) : नल है, पानी नहीं… पोल है, बिजली नहीं… मोबाइल है, नेटवर्क नहीं। सड़क की हालत पर कुछ बोलना ही बेकार है। यह हाल है हजारीबाग के बड़कागांव के तेतरिया टोला का। भोर में आंख खुलते ही चिंता सताने लगती है पानी की। घर की बेटी, बहू, मां को पानी के लिए जाना पड़ता है कोसों दूर। एक्का-दुक्का चापानल चालू है, मगर उसमें पानी का फोर्स नहीं। टप-टप टपकता है पानी। इस भीषण गर्मी में शाम होते ही गांव अंधेरे के आगोश में समा जाता है। दीया है तो मिट्टी तेल नहीं। बड़ी मुश्किल से कटती है रातें।
कई दफा करवट बदलते रतजग्गा हो जाता है। बच्चों की लिखाई-पढ़ाई तक नहीं हो पाती। आसपास के कई गांव में झांकने के बाद कभी-कभी लगता है अपने गांव का भी दिन फिरेगा। पर उनके गांव में न तो कभी कोई नेता आते हैं, न मंत्री और न ही अफसर। उनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं। भला हो मोनिका दीदी का, जिसके प्रयास से गांव में एक बोरिंग हो गया। कुछ हद तक अब पानी की दिक्कत दूर हुई। अब कोसों दूर पानी के लिए जाना नहीं पड़ेगा। काश उनके इलाके के मंत्री और नेता जागते तो उनकी भी सोयी तकदीर जाग उठती। यह सबकुछ कहना है तेतरिया गांव की कुछ महिलाओं का। सुनें क्या बोली महिलाएं
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