Kohramlive : लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को नये सिरे से पेश किया गया। यह विधेयक पहले संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया था। अब बहस के बाद इस पर मतदान होगा। सवाल यह है कि इस विधेयक को पास कराने के लिए सत्ता पक्ष के पास कितना समर्थन है और विपक्ष की ताकत कितनी है? लोकसभा में कुल 543 सीटें होती हैं, लेकिन इस वक्त एक सीट खाली है, यानी 542 सांसद हैं। विधेयक को पारित करने के लिये 272 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। भाजपा के 240 सांसद हैं, जिन्हें विधेयक पास कराने के लिये 32 और सांसदों की जरूरत होगी। टीडीपी (16), जदयू (12), लोजपा (5), शिवसेना (शिंदे गुट), रालोद, जद(एस), जनसेना, अजित पवार की राकांपा, अपना दल, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन, असम गण परिषद और पूर्वोत्तर के अन्य दलों का समर्थन है। NDA गठबंधन के समर्थन से विधेयक का लोकसभा में पास होना लगभग तय। वहीं, कांग्रेस (99), सपा (37), टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (उद्धव गुट), शरद पवार की राकांपा (एसपी), माकपा, राजद, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आईयूएमएल, नेकां और अन्य दल विरोध में। AIMIM, YSRCP और आजाद समाज पार्टी भी विधेयक का विरोध कर रही हैं। निर्दलीय सांसदों में पप्पू यादव, मोहम्मद हनीफा और विशाल पाटिल विरोध में हैं। शिरोमणि अकाली दल और जोराम पीपल्स मूवमेंट का रुख अभी स्पष्ट नहीं।
वहीं, राज्यसभा में कुल 245 सीटें हो सकती हैं, लेकिन वर्तमान में 236 सांसद हैं। विधेयक पास कराने के लिये 119 सांसदों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के 98 सांसद है। भाजपा को जदयू, टीडीपी, राकांपा (अजित गुट) और अन्य सहयोगी दलों का समर्थन है। वहीं, RPI (ए), पत्तली मक्कल काची, तमिल मनिला कांग्रेस, नेशनल पीपल्स पार्टी, निर्दलीय सांसदों का भी समर्थन है। कांग्रेस (27), टीएमसी, आम आदमी पार्टी, डीएमके, बीजद (7), वाईएसआरसीपी, एआईएडीएमके और अन्य विपक्षी दल विरोध में है। बीआरएस (4), बसपा (1) और मिजो नेशनल फ्रंट (1) का रुख स्पष्ट नहीं। छह नामित सांसदों का समर्थन संभवतः सरकार को मिलेगा।
अमित शाह और अखिलेश यादव में हंसी-मजाक
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के पेश होने के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच हंसी-मजाक के अंदाज में तीखे तंज देखने को मिले। अखिलेश का तंज कसते हुये कहा कि भाजपा खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, लेकिन अभी तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाई है। वहीं, अमित शाह ने मुस्कुराते हुये कहा, “आपको तो अपने परिवार के ही कुछ सदस्यों में से अध्यक्ष चुनना होता है, लेकिन हमें 12-13 करोड़ सदस्यों में से लोकतांत्रिक तरीके से अध्यक्ष का चुनाव करना होता है। इसलिये समय लग रहा है। आप तो 25 साल तक अपनी पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे।” इस टिप्पणी पर सदन में ठहाके गूंज उठे और अखिलेश भी मुस्कुराने लगे।
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