UP : लंबे मंथन, कई दौर की चर्चाओं और UPSC की प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश को उसका स्थायी DGP (पुलिस महानिदेशक) मिल गया है। CM योगी आदित्यनाथ ने वर्तमान कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगाते हुये उन्हें प्रदेश का पूर्णकालिक DGP नियुक्त कर दिया है। इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 के बाद पहली बार किसी अधिकारी को नियमित रूप से पुलिस विभाग की सर्वोच्च जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है।
UPSC पैनल में सबसे मजबूत दावेदार थे राजीव कृष्ण
दरअसल, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 26 मई को हुई बैठक के बाद प्रदेश सरकार को तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों का पैनल भेजा था। इसमें 1990 बैच की IPS अधिकारी रेणुका मिश्रा तथा 1991 बैच के IPS अधिकारी पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण के नाम शामिल थे। शुरुआत से ही राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। आखिरकार CM योगी आदित्यनाथ ने भी उन पर भरोसा जताते हुये प्रदेश की पुलिस व्यवस्था की कमान उनके हाथों में सौंप दी।
एक साल से थे कार्यवाहक DGP
राजीव कृष्ण एक जून 2025 से कार्यवाहक DGP के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। इस दौरान उन्होंने पुलिस मुख्यालय से लेकर खुफिया तंत्र तक कई महत्वपूर्ण मामलों की निगरानी की। उनके कामकाज और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुये सरकार ने उन्हें स्थायी जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और UPSC की व्यवस्था के अनुसार किसी भी स्थायी DGP का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का होता है। ऐसे में राजीव कृष्ण वर्ष 2028 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। करीब 35 वर्षों के लंबे पुलिस करियर में राजीव कृष्ण ने कानून-व्यवस्था, खुफिया तंत्र और प्रशासनिक प्रबंधन के कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर काम किया है। उनकी पहचान एक कर्मठ, अनुशासित और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में रही है। कार्यवाहक DGP बनने से पहले वे एक साथ दो अहम जिम्मेदारियां निभा रहे थे। वे DG इंटेलिजेंस और पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन के पद पर तैनात थे। शासन और प्रशासनिक गलियारों में उनकी गिनती भरोसेमंद अधिकारियों में होती रही है।
डकैतों के खिलाफ भी दिखाया दम
राजीव कृष्ण प्रदेश के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस कप्तान रह चुके हैं। लखनऊ, आगरा, नोएडा, मथुरा और इटावा जैसे जिलों में उनकी तैनाती चर्चा में रही। इटावा में SP रहते हुये उन्होंने दस्यु गिरोहों के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की थी। वहीं लखनऊ जोन के ADG के रूप में भी उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले लिये। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान वे बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) में IG ऑपरेशन की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
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