UP : UP के मेरठ के शास्त्रीनगर से आई एक तस्वीर ने रिश्तों, समाज और सोच, तीनों को झकझोर दिया। यह कहानी है एक पिता की, जिसने बेटी के तलाक को हार नहीं, बल्कि उसकी इज्जत की जीत बना दिया। डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ को कोर्ट से घर तक ऐसे लेकर आये, जैसे कोई जंग जीतकर लौटा हो। ढोल-नगाड़े बजे, फूल बरसे और हर कदम पर एक संदेश गूंजा, “बेटी का सम्मान सबसे ऊपर है।” डॉ. शर्मा बोले, “मैं अपनी बेटी को वापस लाया हूं, वो कोई सामान नहीं है।” न एलिमनी की मांग, न कोई शर्त, बस बेटी की इज्जत को सबसे ऊपर रखा।
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UP के एक पिता का साहसभरा फैसला
उन्होंने साफ कहा कि ससुराल में अत्याचार सहना मजबूरी नहीं, उससे बाहर निकलना ही असली साहस है। प्रणिता वशिष्ठ मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट है और वर्तमान में प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर है। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। वर्ष 2022 में उनके भाई, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रणव वशिष्ठ का चंडीगढ़ में एक हादसे में निधन हो गया था। उनकी स्मृति में ही इस अकादमी की स्थापना की गई, जो आज शिक्षा और न्याय के क्षेत्र में जरूरतमंदों के लिये काम कर रही है।
Retired Judge Gyanendra Sharma from Meerut in UP celebrated the Divorce of his Daughter Pranita Sharma from her Husband Army Major Gaurav Agnihotri after 7 years of their marriage. Judge Sahab claimed that they did not take any alimony or Stridhan but its tough to believe. This… pic.twitter.com/nk6kQZlvSi
— NCMIndia Council For Men Affairs (@NCMIndiaa) April 5, 2026
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