Ranchi : सुबह की पहली चाय से लेकर रात के आखिरी बर्तन तक, शहर के हजारों घरों की रफ्तार जिन हाथों से चलती है, वे हाथ अक्सर अधिकारों और पहचान की लड़ाई लड़ते नजर आते हैं। वर्षों से घरों की जिम्मेदारी संभालने वाले घरेलू कामगार अब अपने हक और सम्मान की मांग को लेकर राजधानी रांची में कल सड़क पर उतरेंगे। अंतरराष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस के अवसर पर कल यानी 16 जून को घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच के बैनर तले रांची में रैली और जनसभा का आयोजन किया जायेगा। इस कार्यक्रम के जरिये घरेलू कामगार अपनी समस्याओं, अधिकारों और मांगों को सरकार तथा समाज के सामने मजबूती से रखेंगे।
जयपाल सिंह स्टेडियम से निकलेगी रैली
सोमवार को पुरुलिया रोड स्थित SDC सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच की राज्य संयोजक सिस्टर अंशू ने मीडिया को बताया कि मंगलवार को दोपहर 12 बजे जयपाल सिंह स्टेडियम से रैली निकलेगी। यह रैली राजधानी के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुये नागा बाबा खटाल के समीप पहुंचेगी, जहां एक बड़ी जनसभा आयोजित की जायेगी। सिस्टर अंशू ने कहा कि घरेलू कामगारों का योगदान हर घर और समाज के लिये महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके अधिकारों और सुरक्षा पर अब भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता।संवाददाता सम्मेलन में झारखंड घरेलू कामगार यूनियन की अध्यक्ष अनिपा देवी, कोषाध्यक्ष रेणु लिंडा और सचिव आशा देवी ने कहा कि घरेलू कामगारों को आज भी कई प्रकार की चुनौतियों और असुरक्षाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि रैली और जनसभा के माध्यम से कामगार अपनी आवाज बुलंद करेंगे और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग करेंगे।
घरेलू कामगारों की प्रमुख मांगें
घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच ने कई महत्वपूर्ण मांगों को लेकर अभियान शुरू किया है। उनकी मुख्य मांगों में नियोक्ता के घर को औपचारिक कार्यस्थल घोषित किया जाये, घरेलू कामगारों के मानसिक और शारीरिक शोषण पर प्रभावी रोक लगे, घरेलू कामगारों के लिये अलग राज्य स्तरीय कानून बनाया जाये, सेवानिवृत्त कामगारों के लिये पेंशन व्यवस्था लागू हो, न्यूनतम मजदूरी और उचित वेतन सुनिश्चित किया जाये, रोजगार का पंजीकरण अनिवार्य किया जाये, स्वास्थ्य सुविधा और दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जाये, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिले, शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाये, कार्यस्थल पर सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित किया जाये। सिस्टर अंशू का कहना है कि अब समय आ गया है कि घरेलू कामगारों के लिए ठोस नीतियां और प्रभावी कानून बनाये जायें।
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