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कल लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें सही समय

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Kohramlive : 20 अप्रैल को आसमान में दुर्लभ नजारा दिखने वाला है। हाइब्रिड सूर्य ग्रहण होगा। जो कोई इसे देखने में चूके तो अगला हाइब्रिड सूर्य ग्रहण 15 नवम्बर 2031 में होगा। हाइब्रिड सूर्यग्रहण देखने के लिये फिर आठ साल इंतेजार करना पड़ेगा। पिछला हाइब्रिड सूर्यग्रहण 10 साल पहले तीन नवंबर 2013 को हुआ था। 20 अप्रैल को होने वाले हाइब्रिड सूर्यग्रहण की खासियत यह है कि कुछ खास इलाके में पूर्ण या खग्रास सूर्यग्रहण होगा। वहीं कुछ इलाकों में कुंडलाकार या वलयाकार सूर्यग्रहण होगा। वहीं कुछ जगहों पर आंशिक होगा। निराश करने वाली बातें यह है कि यह नजारा अपने देश में नहीं देखने को मिलेगा। मतलब   यह हाइब्रिड सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। यह पश्चिम ऑस्ट्रेलिया के साथ ही दक्षिणी गोलार्द्ध में देखा जा सकेगा। 20 अप्रैल को लगने वाला सूर्य ग्रहण सुबह 07 बजकर 05 मिनट पर लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा। सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 24 मिनट की रहने वाली है।

सूर्यग्रहण संकर या हाइब्रिड किस्म का होगा। यह दुर्लभ नजारा आसमान में दिखने वाला है। यह चूक गए तो अगला हाइब्रिड सूर्यग्रहण 2031 में आएगा। यानी आठ साल इंतजार करना पड़ेगा। खास बात यह है कि एक क्षेत्र विशेष में यह ग्रहण पूर्ण या खग्रास सूर्यग्रहण होगा। वहीं, कुछ इलाकों में यह एन्यूलर या कुंडलाकार या वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। कुछ इलाकों के लिए आंशिक सूर्यग्रहण होगा। भारतीय खगोलप्रेमी जरूर इस बात से निराश हैं कि यह नजारा वे देश में नहीं देख सकेंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दुर्लभ सूर्यग्रहण को दुनिया के लगभग चार लाख से कुछ कम ही लोग देख सकेंगे। वहीं, लगभग 70 करोड़ लोग आंशिक सूर्यग्रहण देख सकेंगे। खग्रास/वलयाकार सूर्यग्रहण की सबसे लंबी अवधि एक मिनट 16 सेकंड की होगी और यह समुद्र से दिखेगा। जमीन पर सबसे लंबा खग्रास सूर्यग्रहण 1 मिनट 14 सेकंड का होगा, जिसे पूर्वी तिमोर से देखा जा सकेगा। एक्समोथ पेनिन्सुला, ऑस्ट्रेलिया में यह सिर्फ एक मिनट दिखाई देगा।

क्या है हाइब्रिड सूर्य ग्रहण

मीडिया रिपोर्ट में जानकार के हवाले से दावा किया गया है कि पृथ्वी की परिक्रमा करते चांद जब सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है तो सूर्यग्रहण होता है। इसी दरम्यान चांद पृथ्वी के नजदीक होता है तो सूर्य को पूरी तरह ढंक लेता है। उस भाग में खग्रास या पूर्ण सूर्यग्रहण दिखता है। यदि चंद्रमा दूर रहता है और सूर्य एक कंगन के रूप में चमकता दिखता है तो इसे वलयाकार या एन्यूलर सूर्यग्रहण कहते हैं। चंद्रमा न ज्यादा दूर हो और न ही ज्यादा पास तो हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स की स्थिति बनती है।

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