कोहराम लाइव डेस्क: आज यानी 23 नवंबर को अक्षय नवमी है। इस आंवला नवमी भी कहा जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के नौवें दिन अक्षय नवमी मनाई जाती है। इस दिन दान-धर्म का बहुत अधिक महत्व होता है। पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि इस दिन जो दान-पुण्य किया जाता है, उसका लाभ वर्तमान में तो मिलता ही है साथ ही अगले जन्म में भी इसका अच्छा फल मिलता है। आरोग्य लाभ प्राप्त होता है। अक्षय नवमी को देव उठनी एकादशी के दो दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन हर तरह का दान-पुण्य किया जा सकता है।
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अगले जन्म में भी मिलता है आंवला पूजन का आरोग्य लाभ
यह व्रत प्राणियों में आरोग्य शक्ति प्रदान करने वाला है। शास्त्रों के अनुसार आंवला, पीपल, वटवृक्ष, शमी, आम और कदम्ब के वृक्षों को चारों पुरुषार्थ दिलाने वाला कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि इनके पास जप-तप पूजा-पाठ अगर किया जाए तो इससे सभी पाप मिट जाते हैं।
इस प्रकार समझें पूजा विधि
- आंवला नवमी की पूजा करने के लिए सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। फिर आंवले की पेड़ की पूजा करें।
- आंवले के पेड़ की जड़ में दूध चढ़ाएं। साथ ही रोली, अक्षत, फूल, गंध आदि अर्पित करें।
- इसके बाद आंवले के पेड़ की सात बार परिक्रमा करें। दीया भी जलाएं।
- आंवला नवमी की कथा भी सुनें।
- अगर किसी भी कारणवश आप इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा नहीं कर पा रहे हैं या उसके नीचे बैठकर भोजन ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं, तो इस दिन आंवला जरूर खाएं।
साक्षात विष्णु का स्वरूप
पद्म पुराण में कार्तिकेय से भगवान शिव ने कहा था कि आंवला वृक्ष साक्षात विष्णु का ही स्वरूप है। ऐसे में यह वृक्ष विष्णु प्रिय है। व्रत के स्मरण से गोदान के बराबर का फल प्राप्त होता है।
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