kohramlive desk : रेलवे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। सामान्य ड्यूटी से लेकर पटरियों पर फर्राटेदार तरीके से ट्रेनों को दौड़ाने में भी महिलाएं पीछे नहीं है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सरकार का सराहनीय कदम है। मगर लोको पायलट की ड्यूटी कर रही महिलाओं को हर रोज एक परेशानी से दो-चार होना पड़ता है। ट्रेनों के इंजन में टॉयलेट की सुविधा नहीं होना महिला सहायक लोको पायलटों के लिए बड़ी परेशानी का सबब है। नेचुरल कॉल की स्थिति में इन्हें एक गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
दो हजार से अधिक महिलाएं चला रहीं ट्रेन
वर्तमान में लगभग दो हजार से अधिक महिलाएं ट्रेन चला रही हैं। फिर भी रेलवे मंत्रालय ने उनकी सुविधा का ध्यान नहीं रखा। ट्रेनों के इंजन में आजतक टॉयलेट की व्यवस्था नहीं की गई है। लोको पायलट 10 से 12 घंटे की निरंतर ड्यूटी करते हैं। कई बार कई कारण से ट्रेनें कई-कई घंटे लेट चलती है। ऐसे में इनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
ब्रिटेन में 4 घंटे में 40 मिनट का ब्रेक
आईआरएलओ के समन्वयक संजय पांधी ने बताया कि नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन (एनएचआरसी) ने 2013-14 में रेल मंत्रालय से ट्रेन के इंजनों में टॉयलेट व एसी लगाने को कहा था, लेकिन रेलवे ने इस पर अमल नहीं किया। ब्रिटेन में लोको पायलट को आठ घंटे की ड्यूटी में तीन से चार घंटे के बीच 40 मिनट ब्रेक दिया जाता है। दिल्ली मेट्रो में भी पॉयलट ड्यूटी के दौरान ब्रेक लेते हैं, लेकिन रेलवे में लोको पॉयलट की लिंक ड्यूटी 10 से 12 घंटे की होती है और गंतव्य पर पहुंचने के बाद ही ड्यूटी ऑफ होती है।
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