Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने भाजपा और RSS पर तीखा हमला बोलते हुये कहा कि जो लोग आज हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रप्रेम का प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने संगठन के इतिहास का जवाब देना चाहिये। नायक ने आरोप लगाया कि भाजपा और RSS का राष्ट्रवाद महज राजनीतिक दिखावा है और तिरंगा यात्रा के नाम पर जनता के बीच भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि आजादी के बाद लंबे समय तक नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज क्यों नहीं फहराया गया। इतिहास के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 को फहराया गया था। इसके बाद वहां अगली बार राष्ट्रीय ध्वज 26 जनवरी 2002 को फहराया गया। इस तरह करीब 52 वर्षों का अंतर रहा। नायक ने इसी इतिहास को आधार बनाते हुये भाजपा और आरएसएस से पूछा कि आखिर इतने लंबे समय तक तिरंगे से दूरी क्यों रही? हालांकि, आरएसएस की ओर से इस अंतर की एक वजह तत्कालीन Flag Code के प्रावधानों को बताया जाता रहा है, जिसके तहत निजी संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने को लेकर प्रतिबंध थे।
2001 में तिरंगा फहराने को लेकर भी हुआ था विवाद
नायक ने 2001 की घटना का जिक्र करते हुये कहा कि नागपुर स्थित आरएसएस परिसर में कुछ युवाओं द्वारा तिरंगा फहराने की कोशिश को लेकर विवाद हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 26 जनवरी 2001 को तीन लोगों ने आरएसएस के स्मृति भवन परिसर में तिरंगा फहराया था। इस घटना को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, बाद में 2013 में उन्हें सबूतों के अभाव में मामले से मुक्त कर दिया गया। कांग्रेस नेता ने आरएसएस के पुराने वैचारिक साहित्य का हवाला देते हुये भी हमला बोला। उनका कहना है कि 1947 में आरएसएस के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ में तिरंगे के तीन रंगों को लेकर आपत्ति जताई गई थी और भगवा ध्वज को प्राथमिकता देने की विचारधारा सामने रखी गई थी। इतिहास से जुड़े दस्तावेजों पर आधारित रिपोर्टों में भी 14 अगस्त 1947 के Organiser में तिरंगे के तीन रंगों को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी प्रकाशित होने का उल्लेख मिलता है। विजय शंकर नायक ने आरएसएस और भाजपा के राजनीतिक पूर्वजों पर स्वतंत्रता आंदोलन से दूरी बनाये रखने का आरोप लगाते हुये कहा कि आज वही लोग राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई और तिरंगे को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनाया। ऐसे में भाजपा और आरएसएस को अपने अतीत पर भी जनता के सवालों का जवाब देना चाहिये।















