Kohramlive : खर्वे गांव में लोग एक के बाद एक हो रही मौतों से सहमे हुये थे। हर कुछ दिनों पर किसी घर से रोने-बिलखने की आवाज उठती, गांव में मातम छा जाता और फिर जिंदगी किसी तरह आगे बढ़ने लगती। किसी को अंदाजा नहीं था कि इन मौतों के पीछे कोई बीमारी नहीं, बल्कि गांव का ही एक ऐसा चेहरा है, जो हर शोकसभा में संवेदना जताता था, हर अंतिम यात्रा में शामिल होता था और हर बार लोगों को ढांढस बंधाता था। लेकिन सच जब सामने आया, तो पूरा गांव सन्न रह गया। चार महीनों में हुई आठ रहस्यमयी मौतों की गुत्थी सुलझाते हुये पुलिस ने गांव के ही 45 साल के रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार किया है। इल्जाम है कि उसने पुरानी दुश्मनी, अंधविश्वास, आर्थिक विवाद और निजी रंजिशों के चलते अपने परिचितों को शराब में जहर मिलाकर मौत के घाट उतार देता था।
जब गांव ने उठाई आवाज, तब खुलने लगा राज
बीते 6 जून को गांव के कुछ लोगों ने SDPO कार्यालय पहुंचकर फरवरी से मई के बीच हुई आठ संदिग्ध मौतों की जांच की मांग की। ग्रामीणों को संदेह था कि इन मौतों के पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा है। मामले की गंभीरता को देखते हुये पुलिस हरकत में आई। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सात शव कब्र से बाहर निकाले गये और रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। फोरेंसिक जांच के लिये नमूने सुरक्षित रखे गये। यहीं से शुरू हुई उस खौफनाक कहानी की परत-दर-परत जांच।
पहले कुत्ते पर किया ‘मौत का परीक्षण’
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार संदेही गुनहगार रामसहाय जायसवाल ने अपना जुर्म कबूल करते हुये पुलिस के सामने खुलासा किया कि उसने ‘सुहागा’ नामक जहरीला पदार्थ हासिल किया और सबसे पहले उसका परीक्षण एक आवारा कुत्ते पर किया। कुत्ते की मौत के बाद उसे यकीन हो गया कि उसका तरीका काम कर रहा है। इसके बाद शुरू हुआ मौत का सिलसिला।
एक-एक कर चुनता गया शिकार
पुलिस ने मीडिया के सामने खुलासा किया कि आरोपी ने अलग-अलग कारणों से अपने परिचितों को निशाना बनाया। किसी से गाली-गलौज का बदला लेना था, किसी से जमीन का विवाद था, किसी पर पत्नी के प्रति गलत नजर रखने का शक था, तो किसी को वह अपनी बदकिस्मती का कारण मान बैठा था। हर बार तरीका एक ही था, शराब की बोतल, उसमें मिला जहर और फिर कुछ घंटों बाद मौत। फरवरी से मई के बीच बद्री, बुठालू, छत्तूराम, बुधराम, विनोद कुमार, गजानंद, चैतूराम और महेतरूराम की मौत इसी पैटर्न पर हुई। एक व्यक्ति कार्तिक भी इस साजिश का शिकार हुआ था, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।
अंधविश्वास भी बना हत्या की वजह
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को लगता था कि गांव का एक व्यक्ति उस पर तंत्र-मंत्र और जादू-टोना कर रहा है, जिसकी वजह से उसके जीवन में सुख-शांति नहीं है और वह कर्ज में डूबा हुआ है। इसी अंधविश्वास ने भी उसे अपराध की राह पर धकेला।
सबसे बड़ा छल
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि रामसहाय खुद पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करता था। वह अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था, कंधा देता था, सांत्वना देता था और लोगों के साथ दुख बांटने का दिखावा करता था। गांव वालों को क्या पता था कि जिन आंसुओं को वह पोंछ रहा है, उनकी वजह भी वही है। शुरुआत में आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। लेकिन तकनीकी साक्ष्य, ग्रामीणों के बयान और लगातार पूछताछ के दबाव में आखिरकार वह टूट गया। इसके बाद उसने एक-एक मौत की पूरी कहानी पुलिस को बताई। वहीं, खर्वे गांव के लोगों को सहसा इस खुलासे पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं। जिस व्यक्ति के साथ लोग बैठकर चाय पीते थे, हंसी-मजाक करते थे, वही कथित तौर पर मौत का सौदागर निकला। गांव के एक बुजुर्ग कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा मामला पहले कभी नहीं देखा। यह सारी सनसनीखेज वारदात छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के खर्वे गांव में हुई।
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