Palamu : कभी तानों, उपेक्षा और सामाजिक बंधनों के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर रहीं तीन विधवा महिलाओं के जीवन में मंगलवार को नई सुबह आई। अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस के अवसर पर पलामू में आयोजित एक खास कार्यक्रम में तीन विधवा महिलाओं का पुनर्विवाह कराया गया। शादी की रस्में पूरी होने के साथ ही इन महिलाओं ने नया जीवन साथी पाया, वहीं, समाज को भी एक सकारात्मक संदेश दिया। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षाविद अविनाश देव की पहल पर ट्रस्ट के नेतृत्व में किया गया, जिसमें समाज कल्याण विभाग ने भी सहभागिता निभाई।
नई उम्मीदों के साथ शुरू हुई नई जिंदगी
पुनर्विवाह करने वाली महिलाओं में पांकी प्रखंड के सालिमदिरी गांव की अंजू देवी, चिंतामणि और एक अन्य महिला शामिल थीं। विवाह समारोह में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इनकी शादी संपन्न कराई गई। समारोह के दौरान माहौल भावुक भी रहा और उत्साहपूर्ण भी। कई लोगों ने इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
“अब लोगों का मुंह बंद हो जायेगा”
पांकी की रहने वाली अंजू देवी की कहानी संघर्ष और साहस की मिसाल है। वर्ष 2024 में एक सड़क दुर्घटना में उनके पति की मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। अंजू बताती हैं कि पति के निधन के बाद समाज के कई लोगों ने उन्हें ताने दिये। उन्हें मनहूस तक कहा गया और हर बात के लिये दोषी ठहराया जाता था। भावुक होते हुये उन्होंने कहा, “अब लोगों का मुंह बंद हो जायेगा। किसी के पास मुझे लेकर कुछ कहने के लिये नहीं बचेगा।” उनका हाथ पांकी निवासी संदीप यादव ने थामा है।
“विधवाओं को भी जीने का अधिकार है”
अंजू से विवाह करने वाले संदीप यादव ने कहा कि समाज में आज भी विधवा महिलाओं को कई तरह की प्रताड़नाओं और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और विधवा महिलाओं को भी समाज की मुख्यधारा में बराबरी का स्थान मिलना चाहिये।
23 साल बाद फिर सजा दुल्हन का जोड़ा
लातेहार के महुआडांड़ क्षेत्र की रहने वाली चिंतामणि भी इस आयोजन का हिस्सा बनीं। वर्ष 2003 में पति के निधन के बाद उन्होंने लंबे समय तक अकेले जीवन बिताया। करीब दो दशक से अधिक समय बाद उन्होंने रंजीत के साथ विवाह कर जीवन की नई शुरुआत की। विवाह के दौरान उनके चेहरे पर झलकती खुशी लोगों के लिये भावुक पल बन गई। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग की ओर से पुनर्विवाह करने वाले प्रत्येक जोड़े को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस आर्थिक सहयोग का उद्देश्य विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना और महिलाओं को सामाजिक व आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के आयोजक शिक्षाविद अविनाश देव ने मीडिया से कहा कि समाज में आज भी कई विधवा महिलाएं उपेक्षा और भेदभाव का सामना कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मानजनक जीवन दिलाने के मकसद से यह अभियान चलाया जा रहा है। उनका मानना है कि पुनर्विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव की शुरुआत भी है।
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