Kohramlive : पश्चिम एशिया में उठी युद्ध की लपटें अब धीरे-धीरे भारत की रसोई तक पहुंचने लगी हैं। घरों में तो फिलहाल गैस की सप्लाई सामान्य बताई जा रही है, लेकिन होटल-रेस्तरां की रसोई में हालात कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। कहीं डोसा और पूरी गायब हो गई है, तो कहीं चाय की जगह छाछ और नींबू पानी परोसने की नौबत आ गई है। सरकार का दावा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर सिलिंडर मिल रहे हैं, लेकिन बाजार की हलचल बता रही है कि वाणिज्यिक गैस की कमी ने होटल और कैंटीन की रसोई में संकट की आहट पैदा कर दी है। वहीं, कई घर के लोगों को कहना है कि आज की तारीख में रसोई गैस सिलेंडर मिल जाना बहुत मुश्किल हो गया। घंटों लाइन लगाने के बाद भी सुकून नहीं। कई शहरों में होटल और रेस्तरां कम गैस खर्च वाले व्यंजन बनाने लगे हैं। गैस बचाने के लिये कुक अब ऐसे पकवान तैयार कर रहे हैं जिनमें ईंधन की खपत कम हो। कई जगहों पर मेन्यू छोटा कर दिया गया है ताकि गैस का स्टॉक ज्यादा दिनों तक चल सके। चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में कई रेस्टोरेंट ने डोसा और पूरी जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन बनाना बंद कर दिया है। नई दिल्ली के एक ढाबे के बाहर बोर्ड तक लगा दिया गया, “आज सिर्फ दाल-चावल मिलेंगे।” वहीं, गुजरात की एक ऑटोमोबाइल फैक्ट्री की कैंटीन ने तली हुई चीजें बंद कर दी हैं। चाय की जगह नींबू पानी और गर्म सूप की जगह छाछ परोसी जा रही है।
हॉस्टल और पीजी में भी असर
हैदराबाद और बंगलुरू के IT कॉरिडोर में कई हॉस्टलों ने राजमा और छोले बनाना बंद कर दिया है। इससे खासकर उत्तर भारतीय छात्रों को परेशानी हो रही है। दिल्ली के कुछ कैंटीन में भी अब मुख्य भोजन हटाकर केवल सैंडविच, सलाद और फ्रूट चाट दिया जा रहा है।
आखिर क्यों आई गैस की किल्लत?
रसोई और कार्मेशियल सिलिंडर की कमी की वजह पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से जुड़ी हैं, जिसमें Israel, Iran और United States आमने-सामने हैं। युद्ध के कारण Strait of Hormuz और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे तेल और गैस की आपूर्ति तथा परिवहन लागत दोनों बढ़ गये हैं। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक होने के कारण भारत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। पुणे का मशहूर मॉडर्न कैफे गैस खत्म होने के कारण दो दिन बंद रहा। उत्तराखंड, गोवा एवं हिमाचल प्रदेश जैसे पर्यटन राज्यों में होटल मालिक चिंतित हैं। गैस की अनिश्चितता के कारण कई होटल एडवांस बुकिंग लेने से भी बच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन संकट से रेस्टोरेंट की क्षमता घटेगी। इससे फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी असर पड़ सकता है। लोग अब इलेक्ट्रिक ओवन और फ्रायर इस्तेमाल करने वाले क्विक सर्विस चेन की ओर रुख कर सकते हैं।
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