Kohramlive : आस्था, अनुशासन और समर्पण का महापर्व चैती छठ अपने पूरे श्रद्धा भाव के साथ आगे बढ़ रहा है। नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ यह चार दिवसीय व्रत अब खरना के पवित्र पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर भगवान को अर्पित करते हैं। छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अनुष्ठान है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है। इसके बाद शुरू होता है 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत, जो व्रतियों की आस्था और संकल्प की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है। कल और परसों डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य और फिर उगते सूर्य को उषा अर्घ्य देकर यह पर्व अपने चरम पर पहुंचेगा। घाटों पर उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़, लोकगीतों की गूंज और पूजा की पवित्रता पूरे माहौल को भक्तिमय बना देती है। यह व्रत सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि संयम, शुद्धता और सकारात्मकता का संदेश भी देता है, जहां हर व्रती अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ प्रकृति के इस अद्भुत पर्व को निभाता है।
इसे भी पढ़े :झारखंड में अब बढ़ेगी गर्मी, फिर इस रोज से पलटेगा मौसम…
इसे भी पढ़े :बड़ा हा’दसा, मलबे में दबे कई, मच गई चीख-पुकार… देखें वीडियो
इसे भी पढ़े :MLA कल्पना सोरेन को दिल्ली में मिला बड़ा सम्मान… जानें क्यों
इसे भी पढ़े :बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन? हुआ तय! क्या बता गये चिराग… जानें
इसे भी पढ़े :“आ रहे छोटे सरकार”… 3 लाख रसगुल्ले-गुलाब जामुन का शाही भोज…






