UP : बुलंदशहर की गंगनहर की लहरें उस दिन कुछ ज्यादा ही भारी थीं। उन लहरों में बह रही थी साढ़े तीन साल की दिव्यांशी, जिसकी मासूम देह को देखकर पत्थर भी रो पड़ें। वो छोटी-सी जान, जिसने शायद अभी “मां” कहना ठीक से सीखा भी नहीं था, उसे उसी मां ने हमेशा के लिये खामोश कर दिया। नरौरा थाना क्षेत्र के पीएलजीसी नहर में जब मछुआरों ने बच्ची का शव देखा, तो उन्होंने उसे रेती में दबा दिया शायद डर से या दया से। गांव में चर्चा फैली तो पुलिस पहुंची, और शुरू हुआ एक ऐसा सच उजागर होना, जिसने पूरे जिले को हिला कर रख दिया। पहले लगा कि किसी ने बच्ची का अपहरण कर हत्या कर दी है। मां सीमा ने खुद थाने में रिपोर्ट लिखाई, “ललतेश और अन्य लोगों ने मेरी बेटी का अपहरण कर उसे मार दिया।” मगर पुलिस की गहन जांच ने कहानी की असली पटकथा खोल दी।
सीमा का पति अब इस दुनिया में नहीं था। वो अपने प्रेमी यतेन्द्र के साथ रहने लगी थी। तीन बेटे बड़े थे, मगर छोटी दिव्यांशी, वो जहां जाती, मां की गोद से चिपक जाती। यतेन्द्र को यह बोझ लगता था, मां सीमा उसने अपने ही हृदय को पत्थर बना लिया। एक शाम, दोनों ने मिलकर नन्हीं दिव्यांशी का मुंह दबा दिया। जब उसकी नन्हीं-नन्हीं हथेलियां हवा में फड़फड़ा रही थीं, उस वक्त न तो मां के दिल ने दया दिखाई, न ममता ने आवाज़ उठाई। फिर दोनों ने शव को गंगनहर की गोद में फेंक दिया, शायद यह सोचकर कि पानी सब धो देगा, पर पाप कभी नहीं धुलता। जांच में सच्चाई सामने आई
फर्जी मुकदमा, झूठी तहरीर, निर्दोषों को फंसाने की साज़िश, सब कुछ एक योजना के तहत था। SP देहात डॉ. तेजवीर सिंह ने मीडिया से कहा कि “शुरू से ही मां के बयान पर संदेह था। जांच में सामने आया कि असली हत्यारे मां और उसका प्रेमी ही हैं। दोनों को जेल भेज दिया गया।
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