KohramLive : “लता दीदी जैसा कोई सौ सालों तक नहीं बन सकता। वह भगवान की देन थी। साक्षात सरस्वती की अवतार थी। वह घर के सभी लोगों का बहुत ख्याल रखा करती थीं। खास तौर पर दीदी मेरी कुछ ज्यादा ही फिक्र करती थी, क्योंकि मैं घर में सबसे छोटी थी। अभी भी ऐसा लगता है कि दीदी हमारे आस पास ही हैं। जब मैं सात साल की थी, तब से दीदी के साथ ही रही हूं, आज मुझे ऐसा ही लगता है, जैसे हमारे पीछे वह खड़ी हैं।” यह बोल गई दिवगंत स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन उषा मंगेशकर। आवाज की दुनिया में एक अलग पहचान बनाने वाली लता मंगेशकर की पहली पुण्यतिथि पर आज मंगेशकर परिवार ने ऐलान किया कि दीदी की चाहत का ख्याल रखते हुए एक वृद्धाश्रम और गौशाला बनाया जायेगा।

उषा ने मीडिया से कहा कि, दीदी का कहना था कि जो भी कलाकार हैं, उनका बुढ़ापा खराब नहीं होना चाहिये, इसलिए वह वृद्धाश्रम बनाना चाहती थी। उनके इस सपने को पूरा करने जा रहे हैं। वृद्धाश्रम के लिए नासिक में जमीन मिल गई है, जल्द ही इसपर काम शुरू हो जायेगा। वृद्धाश्रम में एक गौशाला भी बनाया जायेगा, जहां पर भटके हुए जानवरों को रखा जायेगा। दीदी ने स्वर मौली फाउंडेशन बनाई थी। इसी संस्था के तहत वृद्धाश्रम का देखभाल किया जायेगा। दीदी की याद में मुंबई यूनिवर्सिटी के सामने एक म्यूजियम बनेगा। यह फैसला महाराष्ट्र सरकार का है। बीते साल दीदी लता मंगेशकर के निधन के तुरंत बाद यह फैसला लिया गया था। इसके लिए सरकार करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह म्यूजियम भारत रत्न लता दीनानाथ इंटर कालेज ऑफ म्यूजिक एंड म्यूजियम के नाम से जाना जायेगा। उषा मंगेशकर कहती हैं, ‘हमने दीदी का सारा सामान संभालकर रखा है। म्यूजियम में दीदी की सारी चीजे रखी जायेगी।’ उषा बताती हैं कि गाने के अलावा दीदी को खाना बनाने का भी बहुत शौक था। वह वेज और नॉन वेज खाना बहुत अच्छा बनाती थी। खास तौर पर गाजर का हलवा लाजवाब और स्वादिष्ट बनाती थीं। उनके जाने के बाद हमने गाजर का हलवा खाना बंद कर दिया। कई लोग उनके हाथ का बना खाना खाते आते थे। उन्हें क्रिकेट और फोटोग्राफी का भी बहुत शौक था। उषा पहली बार अपनी दीदी के साथ फिल्म ‘आजाद’ में ‘अपलम चपलम’ गाना गाई थी। तब उषा को गायिकी का उतनी समझ नहीं थी, वो पेंटिंग करती थी, दीदी के कहने पर ही उसने गाने गाना शुरू किया। इस तरह से गायकी जगत में उसकी शुरुआत हुई थी।

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