- मार्च से अगस्त 2020 की अवधि के लिए नहीं लिया जाएगा दंडात्मक ब्याज
कोहराम लाइव डेस्क : देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लोन मोराटोरियम पॉलिसी में दखल देने मना कर दिया है। ब्याज पर ब्याज मामले में निर्देश दिया है कि मार्च से अगस्त 2020 छह महीने की लोन मोनाटोरियम अवधि के लिए उधारकर्ताओं से कोई चक्रवृद्धि या दंडात्मक ब्याज नहीं लिया जाएगा। यदि पहले ही कोई राशि ली जा चुकी है, तो उसे वापस जमा या समायोजित कर दिया जाएगा।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष न्यायालय केंद्र की राजकोषीय नीति संबंधी फैसले की न्यायिक समीक्षा तब तक नहीं कर सकता है, जब तक कि यह दुर्भावनापूर्ण और मनमाना न हो। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वह पूरे देश को प्रभावित करने वाली महामारी के दौरान राहत देने के संबंध में प्राथमिकताओं को तय करने के सरकार के फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
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केंद्र सरकार और आरबीआई का नीतिगत निर्णय
अदालत ने ट्रेडर एसोसिएशन और अपील करने वाले लोगों की लोन मोराटोरियम की अवधि में ब्याज माफ करने की अपील को ठुकराने के साथ मोराटोरियम अवधि बढ़ाने से भी मना कर दिया, क्योंकि इस फैसले का असर डिपोजिटर्स पर भी पड़ेगा। 2 करोड़ तक के कर्ज पर चक्रवृद्धि ब्याज और साधारण ब्याज के बीच अंतर वसूला गया था। शीर्ष न्यायालय ने 31 अगस्त 2020 से आगे लोन मोराटोरियम का विस्तार नहीं करने के केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि यह एक नीतिगत निर्णय है।
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