गुमला : इसे इत्तेफाक कहे या तकदीर, ट्रेन में बिछड़े पांच बच्चे अब सात साल बाद अपने पिता से मिलेंगे। जहां एक तरफ बच्चों के गम में मां ने दम तोड़ दिया। वहीं पिता लगातार अपने बच्चों की खोज करता रहा। आखिरकार किस्मत को उसके हौंसले के आगे झुकना ही पड़ा। इत्तफाक की बात तो ये है कि पांचों बच्चे करीब 2550 दिन अपने घर गुमला से 120 किमी दूर खूंटी में चाइल्ड लाइन की देखरेख में पलते-बढ़ते रहे। अब बस कुछ ही वक्त की दूरी और एक पिता अपने बच्चों से रूबरु होगा
यह कहानी असम के चाय बगान से गुमला सैमरटोली कोंडरा ट्रेन से लौट रहे रवी तिर्की और उसके 5 बच्चों जुलीन, जसिंता, प्रियंका, प्रकाश और भीम की है। माता-पिता ट्रेन से पानी लेने नीचे उतरे और इसी दौरान ट्रेन खुल गई। इस वजह से बच्चे माता-पिता से बिछड़ गए।
रवी तिर्की ने बताया कि 2015 में बच्चों के गम में पत्नी ने दम तोड़ दिया। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारा। वो असम के रूट पर हर स्टेशन और ट्रेन में तलाश करता रहा। लोग जहां जाने को कहते, वहां पहुंच जाता। आखिरकार उसका प्यार जीत गया। अब बच्चों से मिलने में कुछ ही वक्त की दूरी रह गई है।
सीडब्ल्यूसी की सदस्य सुषमा देवी ने बताया कि रवी तिर्की अपने बच्चे को सालों से खोज रहे थे। वे शनिवार को हम लोगों तक पहुंचे। हमने खूंटी चाइल्ड लाइन और सहयोग विलेज संस्था, खूंटी से संपर्क किया तो उनके बच्चों का पता चला। रवी तिर्की से घटना की जानकारी लेने के बाद बच्चों से बात की गई।
4 बच्चों को बहुत कुछ याद नहीं था, लेकिन बड़ी बेटी ने जो बताया वह रवी की बातों से मिलता था। इसके बाद हम लोगों ने बच्चों को उनके पिता के हवाले करने का निर्णय लिया। पांचों बच्चों को खूंटी से गुमला सोमवार को लाया गया है। मंगलवार को वे परिजनों को सुपुर्द कर दिए जाएंगे।
इसे भी पढ़ें : BREAKING : थाना हाजत से भागा PLFI का एरिया कमांडर कृष्णा यादव उर्फ सुल्तान
इसे भी पढ़ें : ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में नहीं दिखेंगी ‘दयाबेन’, जाने क्या हुआ ऐसा…










