Kohramlive : एक नजाकतभरी आंखें और उसमें छिपी साजिश की रातें। जिसे इश्क समझा गया, वो इंतकाम निकला। जिसे हनीमून समझा गया, वो मौत की मंजिल निकली। और अब जो सामने आ रहा है, वो है “सोलह रातों की वो दास्तां” जो सोनम ने बुन रखी थी सिर्फ बचने के लिये नहीं, भागने के लिये। राजा की हत्या के बाद सोनम लाश को खाई में फेंकवा चुकी थी। हत्यारे अपने-अपने रास्ते निकल चुके थे। सोनम के पास 9 लाख की नकदी और शादी के गहनें थे। उसने इन पैसों से होटल बुक किये, रास्ते बदले, चेहरे बदले, पर दिल में सिर्फ एक डर, कहीं पुलिस उसके चेहरे के पीछे की सच्चाई न देख ले। पुलिस जांच में सामने आया कि 16 दिनों तक सोनम ने 6 जिलों में डेरा डाला। होटल से बुर्का ओढ़कर निकलती फिर ट्रेन या टैक्सी में बैठती, किसी अजनबी की तरह। हर सुबह उसके लिये एक नया किरदार होता, हर रात एक नया नाम। गहने और कैश उसका पासपोर्ट बन चुके थे। सोनम ने कोशिश की थी कि वो लापता दिखे, लेकिन मोबाइल कॉल डिटेल्स ने उसकी हर हरकत को उजागर कर दिया। वो लगातार राज कुशवाह के संपर्क में थी, जिससे उसका ये पूरा खेल शुरू हुआ था। सूत्र बताते हैं, सोनम की फरारी में दो युवक उसके साथ-साथ थे, जो रास्ता सुझाते, कमरा दिलवाते, और जरूरत पड़ने पर नकदी भी बदलवाते। नाम सामने नहीं आये हैं, पर पुलिस जांच की रौशनी अब उनकी तरफ भी मुड़ी है। राजा के शव को फेंकने के बाद उसकी योजना थी वाराणसी से गोरखपुर और फिर सीधे नेपाल में घुस जाने की। गहनों को बेचकर नेपाली पासपोर्ट हासिल करना अगला कदम था। पर वो गाजीपुर में धरा गई। जहां वो आखिरी रात एक लॉज में रह रही थी, बिल्कुल अकेली, बिल्कुल शांत…
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