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मन और व्यवस्था में भी छुपे हैं Rape के कुछ सूत्र

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कोहराम लाइव डेस्क : Rape और हत्याकांड के लगातार सुर्खियों में रहने की वारदात सामने आने के बाद भी क्या आपके मन में ये सवाल नहीं उठता कि आखिर कोई पुरुष रेप करने के बारे में सोचता कैसे है? बलात्कार शब्द का अर्थ ही ‘बलपूर्वक किया जाने वाला काम’ है। सब ताकत का खेल है।  लेकिन, इसे समझना इतना आसान भी नहीं है।

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सामाजिक से लेकर मनोवैज्ञानिक कारणों तक की पड़ताल ज़रूरी है कि आखिर आदमी किसी औरत पर बलात्कार क्यों करते हैं।  जैसा कि मशहूर वैज्ञानिक Sigmond Freud ने कहा था कि ‘शरीर का विज्ञान ही आपकी नियति/किस्मत है’।  तो क्या सिर्फ शरीर के स्तर पर ही इस सवाल का जवाब मिल सकता है या मन और व्यवस्था में भी रेप के कुछ सूत्र छुपे हैं?

रेप करने के कारणों के बारे में चर्चा से पहले कुछ बातें स्पष्ट हो जाना बहुत ज़रूरी हैं।  एक तो ये किसी समाज या पद या वर्ग विशेष के लोगों से यह अपराध या मनोवृत्ति नहीं जुड़ी है। अनपढ़ से लेकर विद्वान, गरीब से लेकर अमीर तक और किसी भी धर्म, जाति या नस्ल के अंतर से कोई अंतर नहीं पड़ता, हर जगह यह अपराध देखा जाता है।  इसके बावजूद, भारत में रेप  के कारणों में सामाजिक पहलू कुछ अलग किस्म के हो जाते हैं।

Rape से जुड़ी कुछ गलतफहमियां

1 .ना का मतलब हां! मर्दों की मानसिकता यह है कि लड़की तो ‘ना’ ही कहेगी, आपको जबरदस्ती ना को हां में बदलना चाहिए।
2.   महिलाओं को मर्द का ताकत इस्तेमाल करना अच्छा लगता है यानी औरतें इसे मर्दानगी समझकर मर्द की इज़्ज़त करती हैं।
3.  जो औरतें शराब या सिगरेट पीती हैं, बाहर खुलकर घूमती हैं, उन्हें नये नये एक्सपेरिमेंट करना पसंद होता है।
4.  औरत अस्ल में मर्द की जायदाद होती है इसलिए वो मर्द का विरोध नहीं कर सकती।

इस तरह की तमाम बातें ‘प्रो रेप’ मानसिकता के लोगों ने कई बार स्वीकारी हैं और कई शोधों में इनका ज़िक्र है।  वागेश्वरी के लेख में कहा गया कि कई बार तो बलात्कार की शिकार लड़की या औरत को पता ही नहीं होता कि उसके साथ यह क्यों हुआ।  बहरहाल, ऐसी घटनाओं से जुड़ी कई सूचनाएं मिलती रही हैं, यहां हम पुरुष से जुड़े कारणों के बारे में चर्चा करते हैं।

मनोविज्ञान क्या कहता है?

मनोविज्ञान आधारित पोर्टल के एक लेख  की  माने तो मनोवैज्ञानिक तौर पर, सेक्स के साथ हिंसा का प्राकृतिक संबंध रहा है।  भाषा में भी आप इसके उदाहरण देख सकते हैं।  ‘जीतना, हारना और समर्पण कर देना या बाज़ी मारना’ जैसी शब्दावली सेक्स के साथ जुड़ती है, जो साफ तौर पर बहादुरी, मर्दानगी या युद्धवीर तरह की मानसिकता से जुड़ती है।  इसी मानसिकता का एक नतीजा गालियों में दिखता है और भद्दी गालियां ‘मां या बहन’ के शब्दों के साथ जुड़ती हैं। विज्ञान में इस सवाल के वैज्ञानिक जवाब की परंपरा फ्रायड के शोधों से शुरू होती है।  ‘एनाटमी इज़ डेस्टिनी’ के सिद्धांत में फ्रायड की थ्योरी को समझें तो प्राकृतिक तौर पर पुरुष में शारीरिक ताकत ज़्यादा होती है इसलिए वह इस बल के प्रयोग से नहीं हिचकता।  इसे फ्रायडवादियों ने ‘नेचर’ तक कहकर परिभाषित किया।  दूसरी थ्योरी कहती है कि सेक्स के साथ हिंसा का स्वाभाविक रिश्ता रहा है।

सेक्स एजुकेशन का अभाव

महिला के साथ सेक्स उसकी और उसके परिवार की इज़्ज़त से जुड़ा है इसलिए महिला के साथ बलात्कार करने से एक पूरे परिवार से बदला लेने या सबक सिखाने जैसी अवधारणा जुड़ी है।

  • नियंत्रण करना, अपनी मर्ज़ी से चलाना या फिर अपनी हुकूमत चलाने जैसी भावनाओं के कारण रेप वर्चस्व की लड़ाई में प्रमुख ​हथियार बनता है।  यह गांवों की मामूली लड़ाइयों से लेकर विश्व युद्ध तक दिखा है।
  • सेक्स एजुकेशन का अभाव एक बड़ा कारण है।  दूसरे शब्दों में लड़कों की परवरिश गलत मानसिकता के साथ किया जाना लड़कियों को एक असुरक्षित समाज देने की बड़ी वजह है।
  • कानून और अपराध के बारे में पूरी और गंभीर समझ की कमी एक महत्वपूर्ण वजह है।  अब इन कारणों को ज़रा बारीकी से समझते हैं।

अध्ययन क्या कहते हैं?

यही नहीं, बलात्कार के आरोपियों के साथ बातचीत पर आधारित शोध करने वाली क्रिमिनोलॉजी की लेक्चरर मधुमिता पांडेय ने एक केस के बारे में बताया था।  साल 2010 में पांच साल की बच्ची से रेप के दोषी 23 साल के कैदी ने पांडेय को बताया था कि उस भिखारन बच्ची ने उसे गलत तरह से छूकर उकसाया।  उसकी मां के चरित्र को लेकर भी उसने ठीक बातें नहीं सुनी थीं इसलिए उसने सबक सिखाने के लिए रेप किया। इस तरह का जस्टिफिकेशन कई केसों में देखा गया। पांडेय की स्टडी में कुछ प्रश्नोत्तरियों के जरिये अपराधियों के  मन  समझा गया था।

इसे  भी  पढ़ें :रहस्यों से भरा हुआ है पाताललोक, आइए जानें कुछ रोचक तथ्य

उन्होंने पाया था कि रेप के अपराधियों में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता बहुत कम और अपनी शारीरिक ताकत को लेकर एक घमंड ज़्यादा था।  इस स्टडी में एक खास बात यह भी सामने आई कि कई अपराधी रेप की ज़्यादा से ज़्यादा सज़ा ये मान बैठे थे कि उन्हें उस लड़की से शादी करने को कहा जाएगा।  बहरहाल, पांडेय के शब्दों में रेप का अपराध जटिल मानसिकता वाला है, इसे हर केस में अलग सिरे से समझना होता है।

विशेषज्ञों की राय क्या है?

कौशल ने दो और मुख्य बातें किताब में उकेरीं। एक प्रमुख सामाजिक कारण यह है कि जिस समाज के लोग प्रताड़ित, शोषित और कुंठित रहे हैं, अपने गुस्से, खीझ और कुढ़न को निकालने के लिए वो एक रास्ता खोजते हैं और रेप का कारण बनता है।  दूसरा प्रमुख पहलू यह भी है कि जिस समाज को आप बेसिक शिक्षा और समझ तक नहीं दे सके हैं, उसके हाथों में इंटरनेट पर तकरीबन मुफ्त अनलिमिटेड पॉर्न दे दिया गया है।  तो, यह गुस्सा और पॉर्न जो मानसिक समीकरण बनाते हैं, जिसे समझना ज़रूरी है।

रेप के अपराधियों, उन अपराधियों से जुड़े लोगों के साथ लंबे समय तक बातचीत करने के बाद निकले निष्कर्षों के आधार पर तारा कौशल की किताब वह्यय मेन  रेप  कई पहलुओं को उघाड़ती है।  कौशल के हिसाब से कई मामलों में पुरुषों को पता ही नहीं था कि रेप क्या होता है! जी हां, औरत से ज़बरदस्ती करना उनके लिए इतना आसान और मामूली बात थी।  यही नहीं, इस किताब में कौशल ने एक जगह दर्ज किया है कि आक्रामक रवैये से औरत को अपनी जायदाद समझना सच्चे प्यार की निशानी तक मानने वाले पुरुष भी हैं।

इसे  भी पढ़ें :करें योग, रहें निरोग

 

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