बोकारो (Rajesh/Pawan): भोर के पौने 4 बजे अपने बेटा को पुकारा, फिर मुझे आवाज दी। तब मेरे मन में पाप आ गया, लगा चारों भूत बनकर आया है। जैसे ही किवाड़ खोले, देखा चारों मेरे सामने खड़ा है। सहसा मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि यह लोग जिंदा है। चारों के हाव-भाव और बातचीत से लगा कि यह बहुत बड़ा चमत्कार है। मां देवी की कृपा से चारों का दूसरा जन्म हुआ है। यह कहना था मोशफिक रजवार का। इनके चार पड़ोसी 4 दिन पहले बीसीसीएल के पर्वतपुर के बंद कोयला खदान में यह लोग कोयला चुनने गये थे। तभी जोरदार आवाज के साथ चास धंसी और चारों के चारों उसमें फंस गये। मौत के जबड़े से बाहर निकले एक शख्स ने बताया कि 2 दिन दो रात तो एक ही जगह दुबक कर बैठा रहा। दोनों ओर से बड़ा-बड़ा चट्टान धम-धम गिर रहा था। चारों ओर से घनघोर अंधेरा था। अजीब सा डराने वाला शोर। पर डरे-सहमे नहीं, दिमाग की बत्ती के साथ-साथ एक टॉर्च की बत्ती भी जलाकर रखे। उनके पास कुल 4 टॉर्च थे। 3 को बुझाकर रखे थे, ताकि बाद में काम आवे। एक साथ चारों का बैट्री खत्म हो जाता तो कहानी खत्म था। दोनों हाथ और पैर से बड़ा-बड़ा पत्थर हटा-हटाकर सरकते हुये आगे बढ़ते रहे। 4 दिन बाद अचानक बाहर की दुनिया नजर आई। यकीने नहीं हुआ कि हमलोग जिंदा बचकर निकल गये। देखें, सुनें, समझें क्या बोले जिंदा बच निकले लोग, पड़ोसी और थानेदार
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