झरिया : 55 साल के मोतीलाल मांझी की नौकरी अभी 4 साल बची हुई थी। वो बीसीसीएल में कार्यरत थे। 31 मार्च 2021 को मोतीलाल मांझी को रिटायरमेंट का पेपर थमा दिया गया। पेपर देखते ही उन्हें ऐसा गहरा झटका और सदमा लगा कि मर गए। लोग बताते हैं कि वे एक नेक दिल इंसान थे। उनके निधन पर यूनियन के नेता, विधायक अरूप चटर्जी और अमर बाउरी ने गहरा दुख जताया है।
अब यूनियन नेता और मृतक के परिजन प्रबंधन पर उनकी मौत की जिम्मेवारी का आरोप लगाया है। यूनियन ने मृतक के आश्रित को तत्काल नौकारी और मुआवजे देने की मांग की है। शव को सुदामडीह इंक्लाइन के हाजरी घर के समीप रखकर प्रबंधन के विरोध नारेबाजी कर रहे हैं। नेताओं ने कहा कि जबतक मृतक के आश्रित को नौकारी और मुआवजा नहीं मिलता तबतक यह आंदोलन जारी रहेगा।
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