Ranchi : महामारी कोरोना जैसे आपदा की दूसरी लहर में रेमिडिसिवर इंजेक्शन ऊंची दाम में बेचने वाले कई चेहरे बेनकाब हो गये। अखबार के पन्नों में ”दानवीर” की संज्ञा पाने वाले चेहरे भी पुलिस जांच में झुलस गये। तेज-तर्रार IPS अनिल पाल्टा के नेतृत्व में बनी स्पेशल टीम ने इस बहुचर्चित कांड की जांच पूरी कर ली है। जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि करीब 250 रेमिडिसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी हुई। जांच में गवाहों के बयान, कंप्यूटर फोरेंसिक, मोबाइल फोरेंसिक, केमिकल एनालिसिस और वॉयस स्पेक्टोग्राफी टेस्ट रिपोर्ट के बाद कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। जांच रिपोर्ट के आधार पर सृष्टि अस्पताल कैंपस में संचालित साईं कृपा मेडिकल एंड सर्जिकल का लाइसेंस रद्द किया गया है। SIT प्रमुख IPS अनिल पाल्टा की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे किये गये हैं।
जांच रिपोर्ट में रेमिडिसिवर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने में शामिल करीब 9 लोगों की पूरी करतूत का खुलासा किया गया है। इस संबंध में शुरू में रांची के कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया था। बाद में इस केस को CID ने टेक ओवर कर लिया था। CID के तत्कालीन ADG अनिल पाल्टा के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया था। रांची पुलिस द्वारा गिरफ्तार राजीव कुमार सिंह को CID ने जेल भेज दिया था। राजीव कुमार सिंह के कई मददगार और पनाहगारों का दागदार चेहरा भी तब खुलकर सामने आया था। जांच में जिन 9 लोगों को दोषी पाया गया है, उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित कर दिया गया है। चार्जशीटेड लोगों में राजीव कुमार सिंह, मनीष कुमार सिन्हा, सुषमा कुमारी, कविलाश चौधरी, डॉ सुधाकर देव, अंजू कुमारी, पुनीत प्रजापति, अनीष कुमार सिन्हा, एवं आशीष गुप्ता शामिल हैं।
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