Ranchi : राजधानी रांची में 18 साल की एक मासूम लड़की के साथ जो हुआ, वह सिर्फ़ एक आपराधिक केस नहीं… वो एक जिंदा जख्म है, जो समाज के चेहरे पर पड़ा है और जिसकी चुप्पी सबसे बड़ा अपराध है। पीड़िता की कहानी 30 सितंबर को शुरू होती है। दशहरा के मेले में बुलावा आया। बुलाने वाला कोई गैर नहीं, उसका रिश्ते का भाई था। लेकिन ये बुलावा त्योहार का नहीं, तबाही का पैगाम था। मेले की भीड़ में जब दो अनजान साए उसके करीब आये, तब शायद उसे अंदाज़ा नहीं था कि इज्ज़त के धागे टूटते देर नहीं लगती। और फिर… उस एक बलात्कार के बाद, शुरुआत हुई भयानक सफर की। सोना टुंगरी, बुंडू, रांची… और फिर वापसी मर्दन मोड़ पर। हर जगह, हर मोड़ पर उसकी आत्मा के हिस्से नोचे गये। सात दरिंदों ने उसके जिस्म को नहीं, उसकी चुप्पी को अपनी सहमति समझ लिया। तमाड़ के थानेदार प्रवीण कुमार मोदी के अनुसार, अब तक 7 आरोपियों पर केस दर्ज किया गया है, जिनमें से 4 की पहचान हो चुकी है। बाक़ियों की तलाश जारी है। पुलिस अब भी दबिश दे रही है और पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई जा रही है।
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