Chouparan : हजारीबाग के चौपारण के पाण्डेयबारा पंचायत में लोगों को बैठने की सुविधा देने के लिये लगाये गये RCC बेंचों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुये ग्रामीणों का इल्जाम है कि लाखों रुपये खर्च कर लगाये गये कई बेंच या तो टूट चुके हैं, या फिर उनमें दरारें पड़ गई हैं। कुछ जगहों पर तो नट-बोल्ट तक गायब बताये जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह लोगों की सुरक्षा का भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह बेंच केवल एक नट-बोल्ट के सहारे टिकी हुई है। बेंच में कई जगह दरारें भी दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इस पर बैठते समय संतुलन खो दे या बेंच अचानक टूट जाये तो बड़ा हादसा हो सकता है।
11 हजार वोल्ट के पोल के नीचे बेंच
ग्रामीणों के अनुसार यह बेंच झाड़ियों के बीच 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन विद्युत पोल के समीप रखी गई है। लोगों का सवाल है कि आखिर सार्वजनिक उपयोग की बेंच ऐसी जगह क्यों रखी गई, जहां सुरक्षा को लेकर लगातार खतरा बना रहे। पंचायत के लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर बेंचों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। कहीं बेंच टूटे हुये हैं तो कहीं उनमें तकनीकी खामियां दिखाई दे रही हैं। ऐसे में ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
BDO बोले, शिकायत नहीं मिली, लेकिन होगी जांच
प्रखंड विकास पदाधिकारी नितेश भास्कर ने कहा कि अब तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि मीडिया के माध्यम से मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि पाण्डेयबारा पंचायत में 15वें वित्त आयोग से कराये गये कार्यों से संबंधित अभिलेख मंगवाये जा रहे हैं। वहीं, कनीय अभियंता और सहायक अभियंता से भी योजना की जांच कराई जायेगी। BDO ने कहा कि जांच के दौरान यह देखा जायेगा कि कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप हुआ है या नहीं, गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया या नहीं तथा निर्माण प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई या नहीं।
मुखिया बोली, सारे आरोप निराधार
पाण्डेयबारा पंचायत की मुखिया रेखा देवी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायत में लगाये गये सभी 50 RCC बेंच स्वीकृत एस्टीमेट और माप पुस्तिका (एमबी) के आधार पर तैयार किये गये हैं। सभी बेंचों का भुगतान भी नियमानुसार किया गया है। मुखिया के अनुसार प्रत्येक बेंच की स्वीकृत लागत लगभग 12,400 रुपये है और राशि लाभुक समिति के माध्यम से निकाली गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कोई संदेह है तो प्रशासन और आम जनता स्वतंत्र रूप से इसकी जांच कर सकती है। इस बीच समाजसेवी जीतू यादव ने कहा कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई बेंच टूटे हुये हैं या उनमें जरूरी फिटिंग तक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि एक बेंच की लागत 12,400 रुपये बताई जा रही है, जबकि उनकी नजर में इसकी वास्तविक कीमत 1,200 से 1,500 रुपये के आसपास हो सकती है। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है। उन्होंने कहा कि जब जनता सवाल उठा रही है तो निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिये।
इसे भी पढ़ें : सिमडेगा की बेटियों ने रचा इतिहास, CM हेमंत सोरेन को भेंट किये अपने बागों के आम…
इसे भी पढ़ें : मोरहाबादी में सजेगा कृषि का महाकुंभ, CM को दिया गया खास न्योता…
इसे भी पढ़ें : कोरोना में बोया था सपना, अब सात समंदर पार बिखर रही है आम की खुशबू…
इसे भी पढ़ें : T20 World Cup का महासंग्राम, इस रोज भिड़ेंगे भारत-पाक…
इसे भी पढ़ें : हर घर तक पहुंचे शुद्ध पानी, CM हेमंत सोरेन ने दिये सख्त निर्देश…









