Ranchi : झारखंड में अफीम, गांजा, ब्राउन शुगर और सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते नेटवर्क के खिलाफ सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब नशे के कारोबारियों की जानकारी छिपाकर बैठना नहीं, बल्कि उनकी सूचना देना फायदे का सौदा साबित हो सकता है। झारखंड सरकार ने एक नई पुरस्कार नीति-2026 लागू कर दी है, जिसके तहत ड्रग्स तस्करों, पेडलरों और अवैध अफीम-गांजा की खेती की सूचना देने वाले लोगों को नकद पुरस्कार दिया जायेगा। इतना ही नहीं, यदि सूचना देने के कारण किसी मुखबिर पर हमला होता है या उसकी जान चली जाती है, तो सरकार उसके परिवार को 20 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता भी देगी।
झारखंड में क्यों पड़ी इस नीति की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में झारखंड के कई जिलों में मादक पदार्थों का अवैध कारोबार तेजी से फैला है। खासकर खूंटी, चतरा, पलामू, लातेहार, गुमला और लोहरदगा जैसे इलाकों में अफीम की अवैध खेती बार-बार सुरक्षा एजेंसियों के लिये चुनौती बनती रही है। वहीं रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और हजारीबाग जैसे शहरी क्षेत्रों में ब्राउन शुगर, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन सरकार का मानना है कि आम लोगों की भागीदारी के बिना इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना मुश्किल है।
अब सूचना देने वालों को मिलेगा सीधा फायदा
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी संकल्प के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति की सूचना के आधार पर पुलिस, ANTF या किसी अन्य ड्रग लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसी को नशीले पदार्थों की बरामदगी होती है, तो उस व्यक्ति को पुरस्कार दिया जायेगा। सरकार ने साफ किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जायेगी। इसके लिये विशेष सुरक्षा व्यवस्था और गोपनीय रिकॉर्ड प्रणाली विकसित की जायेगी।
हेरोइन, ब्राउन शुगर और कोकीन पर सबसे ज्यादा ईनाम
नीति में विभिन्न मादक पदार्थों के लिये अधिकतम पुरस्कार राशि तय की गई है।
- हेरोइन/ब्राउन शुगर: 1.20 लाख रुपये प्रति किलो तक
- कोकीन: 2.40 लाख रुपये प्रति किलो तक
- मॉर्फीन: 20 हजार रुपये प्रति किलो तक
- गांजा: 600 रुपये प्रति किलो तक
- हशीश ऑयल: 10 हजार रुपये प्रति किलो तक
- इनाम की कुल राशि का 50 प्रतिशत मुखबिर और 50 प्रतिशत कार्रवाई करने वाले सरकारी कर्मियों को मिलेगा।
अफीम और गांजा की खेती की सूचना पर भी ईनाम
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में अवैध अफीम खेती को खत्म करने के लिये भी सरकार ने बड़ा प्रावधान किया है। यदि किसी व्यक्ति की सूचना पर अवैध अफीम या गांजा की फसल नष्ट की जाती है, तो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पुरस्कार दिया जायेगा। इससे गांवों में छिपकर की जा रही खेती की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
मुखबिर की सुरक्षा का भी पूरा इंतजाम
अक्सर देखा गया है कि तस्करों के खिलाफ सूचना देने वाले लोग अपनी पहचान उजागर होने के डर से आगे नहीं आते। इसी वजह से सरकार ने इस बार सुरक्षा पर खास जोर दिया है। नीति के अनुसार मुखबिर का नाम सार्वजनिक नहीं किया जायेगा। विशेष कोड और गोपनीय रिकॉर्ड रखा जायेगा। बैंक खाते के माध्यम से भी भुगतान संभव होगा। पहचान लीक करने वाले सरकारी कर्मियों पर कार्रवाई होगी।
हमला हुआ तो सरकार बनेगी सहारा
यदि किसी मुखबिर पर सूचना देने के कारण हमला होता है, तो सरकार आर्थिक सहायता देगी।
| स्थिति | सहायता राशि |
|---|---|
| मृत्यु | ₹20 लाख |
| 100% दिव्यांगता | ₹10 लाख |
| 40% से अधिक दिव्यांगता | ₹5 लाख |
| गंभीर चोट | ₹3 लाख |
| सामान्य चोट | ₹50 हजार |
यह प्रावधान झारखंड की इस नीति को देश की सबसे संवेदनशील और मुखबिर-सुरक्षा केंद्रित योजनाओं में शामिल करता है।
टोल फ्री नंबर और वेब पोर्टल जल्द
सरकार जल्द ही एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर और विशेष वेब पोर्टल शुरू करेगी। इसके जरिये लोग घर बैठे भी नशा तस्करी, पेडलिंग या अवैध खेती की सूचना दे सकेंगे। सूचना फोन, ई-मेल, वेब पोर्टल या सीधे पुलिस को भी दी जा सकेगी।
युवाओं को बचाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि नशे का कारोबार केवल अपराध नहीं, बल्कि समाज और भविष्य पर हमला है। खासकर युवाओं को इसकी गिरफ्त से बचाने के लिये यह नीति लाई गई है। झारखंड में बढ़ते नशे के नेटवर्क के बीच सरकार का यह कदम एक बड़े जनअभियान की शुरुआत माना जा रहा है। अब पुलिस के साथ-साथ आम लोग भी इस लड़ाई के हिस्सेदार बनेंगे। सीधी बात यह है कि अब झारखंड में नशा तस्करों की सूचना छिपाने वालों से ज्यादा सम्मान और फायदा उन्हें मिलेगा जो आगे आकर समाज को नशामुक्त बनाने में मदद करेंगे।
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