Pakur(Jaidev Kumar) : कुछ अलग करने की चाह और प्रबल इच्छाशक्ति हो तो मेहनत के दम पर कामयाबी हासिल की जा सकती है। इंटर की पढ़ाई के समय शादी हो गई। घर संसार जिम्मेदारी कंधे पर आ गई, पर मन में कुछ अलग करने की चाहत बनी रही। इस बारे में पति और ससुराल वालों को बताया। सबका साथ मिला। पूरे लग्न, जुनून और जज्बे के साथ ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की और सपना साकार हो गया। यह कहना है घर की बहू तृप्ति कुमारी। यूजीसी नेट का रिजल्ट आने के बाद से वह बहुत खुश है। वहीं घर के लोगों को उसपर नाज है। घर में खुशियां छाई हुई है। तृप्ति का कहना है कि अगर पति संतोष गुप्ता और ससुराल वालों का साथ नहीं मिला होता, तो वह कभी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं बन पाती। नेट क्वालीफाई करने वाली तृप्ति का कहना है कि साल 2009 में वह इंटर की डिग्री हासिल की थी। उसके कुछ दिन बाद ही उसकी शादी संतोष से हो गई। मन में एक कसक रह गई। वह आगे और पढ़ना चाहती थी। मन में संकोच भी था कि न जाने उसकी यह तमन्ना या ख्वाहिश पूरी होगी या नहीं। एक रोज बड़े हौले से उसने अपने पति के सामने मन में संजोए अपने सपने के बारे में बताया। पति ने पहले उसे समझाया, अब घर संसार को बसाना और आगे ले जाना तेरी जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी के बोझ तले सपने को साकार करना एक कठिन डगर है। वहीं घर के लोग यह नहीं चाहेंगे कि बहू आंगन की दहलीज लांघे। पर जिद के आगे जीत, तृप्ति ऑनलाइन पढ़ाई कर अपने सपने को साकार कर ली। तृप्ति ने सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से BCA (बैचलर इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन) किया। नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से बिलिब (बैचलर इन लाइब्रेरी साइंस) एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से एमलिब (मास्टर इन लाइब्रेरी साइंस) किया। इस तरह वह नेट क्वालीफाई कर पाकुड़ में अपनी एक अलग पहचान बना ली।
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