कोहराम लाइव डेस्क : नए कृषि कानूनों के विरोध में सड़क से सदन तक संग्राम जारी है। इसी बीच बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपना संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों का बहुत सम्मान करती है और कृषि क्षेत्र की बेहतरी के लिए हमने ईमानदारी से प्रयास किए हैं। इस दौरान बाधा उत्पन्न करने की कोशिश करने वाले विपक्षी सांसदों को भी प्रधानमंत्री ने आड़े हाथों लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में 18वीं सदी की सोच से कृषि का भला नहीं कर सकते, इसे बदलना होगा। तीनों कृषि कानून लागू होने के बाद देश में कहीं मंडी बंद नहीं हुई और न ही एमएसपी बंद हुआ, एमएसपी पर खरीद बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि हम किसी भी कोने में हों या समाज के किसी भी वर्ग से हों, लेकिन हमें एक नया संकल्प करना चाहिए कि हम भारत को आजादी के 100 वर्षों में कहां ले जाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, कोविड के बाद की दुनिया बहुत अलग हो रही है। ऐसे समय में वैश्विक रुझानों से अलग-थलग रहना नुकसानदायक होगा। हमें एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरना होगा। यही कारण है कि देश आत्मनिर्भर भारत के लिए काम कर रहा है।
स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी भगवान का रूप बनकर आए
कोरोना काल में भारत ने जिस प्रकार से अपने आपको संभाला और दुनिया को संभालने में मदद की, वह एक प्रकार से टर्निंग प्वाइंट है। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की एक टिप्पणी का उल्लेख करते हुए लोकसभा में कहा कि भगवान की कृपा थी कि दुनिया हिल गई, लेकिन भारत बच गया, स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी भगवान का रूप बनकर आए।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण देश के 130 करोड़ नागरिकों की संकल्प शक्ति का परिचायक है। विकट और विपरीत परिस्थितियों में देश किस प्रकार से अपना रास्ता चुनता है, रास्ता तय करता है और उसे हासिल करते हुए आगे बढ़ता है। कई विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत की विकास दर दहाई अंकों में होगी, मुझे उम्मीद है कि देशवासियों की अकांक्षा के अनुसार देश प्रगति करेगा।
हमारे यहां एग्रीकल्चर समाज के कल्चर का हिस्सा रहा है। हमारे पर्व, त्योहार सब चीजें फसल बोने और काटने के साथ जुड़ी रही है। यहा राजा जनक और कृषि के भाई बलराम ने भी हल चलाई है। कृषि के क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता है। हमारे यहां संभावना है। किसानों को सही तरीके से गाइड करना होगा। कृषि में निवेश की आवश्यकता है।
पीएम मोदी के कांग्रेस पर निशाना साधने के साथ ही कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी सहित कई कांग्रेसी नेताओं ने हंगामा किया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की और कहा कि काले कानून वापस लो।
जनता की भलाई के लिए सरकार को आगे आने चाहिए : मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा कि जब ये कहा जाता है कि मांगा गया था क्या, क्या हम सामंतशाही हैं जो जनता को मांगने के लिए मजबूर करें… ये मांगने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती है। सरकारें संवेदनशील होनी चाहिए। जनता की भलाई के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। जनता ने आयुष्मान भारत योजना नहीं मांगी थी, बैंक अकाउंट के लिए कोई जुलूस नहीं निकला था, स्वच्छ भारत की मांग किसने की थी, किसने अपने घर में शौचालय की मांग की थी। मांगने वाला वक्त चला गया ये लोकतंत्र है, हम नागरिकों को याचक बनाकर उनका आत्मविश्वास नहीं बढ़ा सकते हैं।
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पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि आजादी के बाद हमारे देश में 28 प्रतिशत खेतहर मजदूर थे।10 साल पहले जो जनगणना हुई तो ये संख्या 55 प्रतिशत हो गई। ये किसी भी देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इस देश के छोटे किसान को कुछ पैसे मिले इसकी किसी भी किसान संगठन ने मांग नहीं की थी। लेकिन प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत उनको हमने सामने से धन देना शुरू किया। हमारा किसान आत्मनिर्भर बने, उसे अपनी उपज बेचने की आजादी मिले, उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है। हमारा किसान सिर्फ गेहूं – चावल तक सीमित न रहकर, दुनिया में जो आवश्यकता है, उसका उत्पादन करके बेचे।
हर किसी को अवसर मिलना चाहिए : पीएम
पीएम ने कहा कि देश का सामर्थ्य बढ़ाने में सभी का सामूहिक योगदान है। जब सभी देशवासियों का पसीना लगता है, तभी देश आगे बढ़ता है। देश के लिए पब्लिक सेक्टर जरूरी है तो प्राइवेट सेक्टर का योगदान भी जरूरी है। आज मानवता के काम देश आ रहा है तो इसमें प्राइवेट सेक्टर का भी बहुत बड़ा योगदान है। आज गरीब से गरीब परिवार तक स्मार्टफोन पहुंच रहा है। आज हिंदुस्तान में सबसे सस्ता डेटा है। क्या भारत के सभी वैक्सीन निर्माता सरकारी हैं क्या। हम किसी भी प्राइवेटाइजेशन को नकार देंगे तो गलत होगा। हर किसी को अवसर मिलना चाहिए। किसी को गाली देना और बेईमान कह देना गलत होता है। सबकुछ बाबू करेंगे क्या, बाबुओं को ताकत देकर हम क्या करेंगे। युवाओं को जितनी ताकत देंगे उसका उतना ही फायदा होने वाला है। आशंकाओं को हवा दी जाती है। माहौल ये आंदोलनजीवी पैदा करते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि मैं एक बार देश के किसानों से फिर अपील करता हूं कि आइए टेबल पर बैठकर मिलकर समस्याओं का समाधान करें। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए राष्ट्रपति को धन्यवाद देते हुए अपने संबोधन को विराम दिया।
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