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एक धुआं, एक गंध और फिर चीख, सबको डरा गया…

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UP : तड़के पौने पांच, किसान पथ की उस वीरान सड़क पर सन्नाटा पसरा था। तभी एक स्लीपर बस दौड़ती हुई गुजरी, अंदर गहरी नींद में डूबे थे बेगूसराय, समस्तीपुर और सीतामढ़ी के मेहनतकश लोग। दिल्ली की ओर कुछ सपने, कुछ मजबूरियां लिये। लेकिन उन्हें क्या पता था कि किस्मत की सुई आज समय के सबसे काले धागे से टकरा चुकी है। उस बस में बैठी लख्खी देवी अपनी बेटी सोनी का हाथ थामे किसी गहरे ख्वाब में थी। कुछ सीटों पीछे राम बालक अपनी गुड्डी और दो मासूमों के साथ थे, देवराज और साक्षी, जिनकी उम्र इतनी छोटी थी कि उन्हें अभी तक यह भी ठीक से नहीं मालूम था कि “दिल्ली” क्या होती है। और फिर… एक धुआं… एक गंध… एक चीख…”बस में आग लग गई।” यह हादसा लखनऊ से सटे पीजीआई कल्ली के पास से गुजरते समय किसान पथ पर हुआ।

कोई चीखा। फिर दूसरी तरफ से आवाज आई, “बचाओ! दरवाजा नहीं खुल रहा…” आग भीतर फैल चुकी थी। शोर और धुएं ने नींदों को तोड़ डाला था। कोई खिड़की तोड़ने लगा, कोई दूसरे पर चढ़कर खुद को बचाने की जद्दोजहद में था। पर जिन्हें बचाना था, वो तो भाग गये थे। ड्राइवर और कंडक्टर, वही जो पूरी रात यात्रियों को धमकाकर खचाखच बस भर रहे थे, वो खिड़की तोड़कर भाग निकले। राम बालक जब अपनी पत्नी गुड्डी को थामे बाहर आया तो उसकी गोद खाली थी, देवराज और साक्षी वहीं आग में झुलस चुके थे। दूसरी तरफ लख्खी देवी और सोनी, मां-बेटी की वो जोड़ी जो अब कभी किसी बगल की सीट पर साथ नहीं बैठेगी। और मधुसूदन… 19 साल का था। कोई सपना लेकर जा रहा था। दिल्ली में पहली नौकरी। अब उसका नाम भी बस कागजों में है। राम बालक ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई है, इल्जाम “गैर इरादतन हत्या” का। इस बीच यूपी के CM योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि मृतक के परिजनों को बतौर मुआवजा चार लाख रुपये दिये जायेंगे। मोहनलालगंज पुलिस कह रही है — “ड्राइवर-कंडक्टर को पकड़ेंगे।”

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