Ranchi : धूप धीरे-धीरे स्कूल की पुरानी दीवारों से सरक रही थी और उन दीवारों पर उभर रहे थे कुछ नये सपनों के रंग। अचानक परिसर में गाड़ियों की चहल-पहल बढ़ी और वहीं उतरे झारखंड सरकार के कल्याण मंत्री चमरा लिण्डा जिनकी नजर में एक ही सपना था, “हर आदिवासी बच्चे को मिले वो मंच, जहां से वो आसमान को छू सके।”
औचक निरीक्षण, उम्मीदों की टोह में
रांची के जिला स्कूल परिसर में संचालित ‘आकांक्षा’ कार्यक्रम का निरीक्षण करते हुये, मंत्री लिंडा ने बच्चों की आंखों में छिपे भविष्य को पढ़ते हुये कहा, “एसटी/एससी समाज के बच्चों में कोई कमी नहीं, बस उन्हें सही दिशा चाहिये, “इंजीनियरिंग हो या मेडिकल – हमारे बच्चे हर मोर्चे पर खरे उतर सकते हैं।” उन्होंने कहा कि जब शिक्षा अच्छी हो, तो कोई भी बच्चा पीछे नहीं रह सकता।” मंत्री लिंडा ने आगे कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों में असीम प्रतिभा और ऊर्जा है। जरूरत है उन्हें संभावनाओं के सही रास्ते दिखाने की मंत्री ने कहा, “हमारा प्रयास यही है कि बच्चे सिर्फ सपने न देखें, बल्कि उन्हें सच भी करें।” मंत्री चमरा लिंडा के साथ कल्याण विभाग के सचिव कृपानंद झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त अजय नाथ झा, जिला कल्याण प्रोजेक्ट डायरेक्टर संजय कुमार भगत, आकांक्षा कार्यक्रम के संयोजक वी. के. सिंह और बच्चे थे।
क्या है ‘आकांक्षा’ कार्यक्रम?
- निःशुल्क कोचिंग योजना, जिसमें झारखंड के 10वीं और 12वीं पास मेधावी आदिवासी छात्र-छात्राओं को इंजीनियरिंग एवं मेडिकल जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जायेगी। कोचिंग की शुरुआत जुलाई 2025 के पहले सप्ताह से होगी।
चयन प्रक्रिया कैसी होगी?
- ICSE, CBSE और JACK बोर्ड के रिजल्ट आने के बाद आवेदन लिये जायेंगे।
- मेधावी बच्चों का चयन कर उन्हें आकांक्षा के जरिये प्रवेश मिलेगा।
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