Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा की सुबह आज थोड़ी भावुक थी, थोड़ी गर्वित। जहां एक कप कॉफी ने रिश्ते जोड़े और एक झुकती नजर ने सम्मान लुटाया। गढ़वा के सदर SDO संजय कुमार की पहल पर जब वीर सैनिकों के माता-पिता, पत्नियां, भाई और वो मांएं, जिनके बेटे आज सीमाओं पर तैनात हैं, “कॉफी विद एसडीएम” में शामिल हुये तो प्रशासन और जनभावना एक मंच पर खड़े थे। किसी ने 1971 के युद्ध की यादें बांटी, किसी ने कारगिल के जख्मों की तस्वीरें, तो किसी ने बेटे के नाम सीमा की मिट्टी भेजने की बात कही। SDO संजय कुमार ने जब पूर्व सैनिकों के पैर छूकर उन्हें सम्मानित किया, तो गढ़वा की मिट्टी ने गर्व से सिर उठाया, क्योंकि यह सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक राष्ट्र का नमन था। किसी मां की आंखों में नमी थी, तो किसी पिता की मुस्कान में बलिदान की कहानी। कुछ ने समस्याएं रखीं, कुछ ने सुझाव दिये और सबने एक स्वर में कहा, “सैनिक कभी रिटायर नहीं होता, उसकी सेवा जीवन भर चलती है।”
ऑपरेशन सिंदूर के शूरवीरों को भी नमन किया गया। अवैध शराब और डीजे पर कार्रवाई के लिये SDO को तालियों की गूंज मिली। एक प्रतिष्ठान ने फौजियों के परिजनों को भेंट देकर सम्मान जताया। सिविल डिफेंस को सक्रिय करने की मांग पर भी विचार मंथन हुआ। पूर्व सैनिकों के लिये अलग क्लब और शहीद स्मारक की मांग भी सामने आई। यह संवाद नहीं, एक सलामी थी। उनके लिये जो देश की नींव हैं। उनके लिये जिनके त्याग पर खड़ा है हमारा आज।














