Bihar : झारखंड के बाद अब बिहार में भी एक आदमखोर बाघ सबको डरा रहा है। खेत में घास काटने गई दो महिलाओं पर इस इस बाघ ने अटैक कर दिया। एक महिला सुनीता देवी की चीख-चीत्कार पर उनका पति सुरेंद्र कुमार ने हिम्मत दिखाई और गड़ासा से बाघ पर वार कर दिया। पति सुरेंद्र उसी खेत में अपनी पत्नी से कुछ दूरी पर था। गड़ासा के वार और गांव वाले को जुटता देख बाघ वहां से भाग गया। लहुलूहान सुनीता और कुमकुम को को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुमकुम देवी के पैर और पीठ पर बाघ ने हमला किया है। सुनीता और कुमकुम को लहुलूहान करने के बाद बाघ ने एक दूसरी महिला अंजू कुमारी को निशाना बनाया। उसके पैर में जख्म हुआ। शोर गुल सुनकर स्थानीय ग्रामीण खेत के तरफ दौड़े। सुनीता और कुमकुम घर के मवेशियों के लिये खेत में घास लाने गई थी। आदमखोर बाघ के खेत तक आ जाने की फैली खबर के बाद से लोगों में डर-भय है। खौफजदा लोग अकेले खेतों में जाने से डर रहे हैं। डर से लोगों ने घरों से निकलना छोड़ दिया है। घरों में ही दुबके पड़े हैं। वहीं वन विभाग ने पटना के स्पेशल रेस्क्यू टीम से मदद मांगी है। यह डरावनी वारदात सीतामढ़ी के रामनगरा वार्ड नंबर 3 से उछलकर सामने आई है। इधर, झारखंड के तीन जिले आदमखोर एक तेंदुए के आतंक डरे-सहमें हैं। इस आदमखोर तेंदुए का आतंक खत्म करने के लिये हैदराबाद से एक खास शूटर को गढ़वा में बुलाया गया है। अबतक ना तेंदुआ मिला और ना ही उसका डर खत्म हुआ है।
बाघ को अपने आंखों से देखने वाले सुरेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया कि वह अपनी पत्नी सुनीता से कुछ दूर खेत में थे। अचानक उन्होंने अपनी पत्नी की चीखने की आवाज सुनी। एक ही दम में वह भागा-भागा पत्नी के पास पहुंचा। वह खून से लथपथ पड़ी हुई थी। बाघ उससे थोड़ी दूर पर था। सुरेंद्र के हाथ में गड़ासा था, उसने गड़ासा से बाघ पर वार कर दिया। इसके बाद बाघ वहां से भागा। इस बीच गांव के लोग भी हरवे-हथियार लेकर जुटने लगे थे। बिहार के बगहा में भी बाघ का आतंक था। इस बाघ ने एक मां-बेटे को अपना शिकार बनाया। इसके बाद बीते 7 अक्टूबर को बाघ को मारने का फरमान जारी हुआ। बिहार STF की एक स्पेशल टीम ने बाघ का इनकाउंटर किया। बाघ जंगल से सटे गांवों में लोगों को अपना शिकार बना रहा था। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का बाघ T-105 आदमखोर हो गया था। वो 9 इंसानों की जान ले चुका था। शूटरों की टीम बाघ के पैरों के निशान देखते हुए एक गन्ने के खेत तक पहुंचे। उसे चारों तरफ से घेरा गया। हाथी पर चढ़कर एक्सपर्ट शूटर की टीम खेत के अंदर घुसी और बाघ को 4 गोलियां मारी। 26 दिनों के ऑपरेशन में बाघ को ढेर कर दिया गया। ऐसा भी नहीं है कि पहली बार किसी आदमखोर बाघ को मारा गया हो। इसके पहले भी बाघों का आतंक रहा है। सबसे खूंखार बाघिन नेपाल की थी। उसने नेपाल और भारत में कईयों को मारा था। इससे पहले 1957 में नवादा जिले के रजौली के जंगल में एक बाघ को मारा गया था। बाघ का खौफ ऐसा था कि लोग अपने घरों को छोड़ने को मजबूर हो गये थे।
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