New Delhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी आज जंतर-मंतर पहुंचे और छात्रों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र परेशान हैं, अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन सरकार उन्हें अपनी आवाज उठाने से रोक रही है। उनके मुताबिक, ‘व्यवस्था’ बनाये रखने के नाम पर अगर लोगों की आवाज ही दबा दी जाये तो फिर उस व्यवस्था का मतलब क्या रह जाता है। उन्होंने कहा कि उनका काम इसके ठीक उलट है। वह चाहते हैं कि भारत का हर नागरिक खुलकर अपनी बात कह सके, सवाल पूछ सके और अपनी तकलीफ सामने रख सके। राहुल गांधी ने एक ऐसी महिला का भी जिक्र किया, जो उनसे मिलने पहुंची थी। उन्होंने बताया कि महिला की बेटी के साथ करीब चार साल पहले उत्तराखंड में दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। राहुल गांधी के मुताबिक, महिला अपनी बेटी के लिये न्याय मांग रही थी। वह रो रही थी, अपना दर्द सुनाना चाहती थी, लेकिन उसे भी अपनी आवाज उठाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस घटना को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के दर्द से जोड़ते हुये कहा कि मुद्दा सिर्फ एक छात्र या एक परिवार का नहीं है। सवाल यह है कि क्या इस देश में आम आदमी को अपनी बात कहने की जगह मिलेगी?
‘नरेंद्र मोदी रात को नहीं सोते’, राहुल का तंज
नई दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखे राजनीतिक हमले किये। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार को परेशान करना नहीं, बल्कि देश की आवाज को सरकार तक पहुंचाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुये राहुल गांधी ने कहा कि वह रात में नहीं सोते और इसके कई कारण हैं। अमित शाह का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि जिनकी तुलना कभी चाणक्य और सरदार पटेल से की जाती थी, वे 20 दिनों तक संसद भवन में प्रवेश नहीं कर पाये। राहुल गांधी ने अपने भाषण में RSS को लेकर भी गंभीर आरोप लगाये। उन्होंने दावा किया कि बड़े कारोबारी समूहों ने RSS का इस्तेमाल अपने हितों के लिये किया। उन्होंने छोटे कारोबारियों, मिठाई वालों और बनिया समुदाय का जिक्र करते हुये कहा कि कभी ये वर्ग RSS से जुड़ा हुआ था, लेकिन GST और नोटबंदी ने छोटे कारोबारियों को नुकसान पहुंचाया। विदेश नीति को लेकर भी राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार ने मान लिया था कि किसी नेता को गले लगा लेना ही विदेश नीति है। अपनी बात को समझाने के लिये राहुल गांधी ने मंच पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाया और इसे उदाहरण के तौर पर पेश किया।















