रांची : केबीसी में एक करोड़ रुपये जीत कर देशभर की निगाहों और खासकर रांची का नाम रोशन कर कोहिनूर बन गई नाजिया (Nazia) अपने परफॉरमेंस पर बेहद खुश है। उसकी मां को तो बेटी पर नाज है। क्यों न हो, बेटी ने आखिर एक मां का ख्वाब पूरा किया। आइए सुनते हैं उनकी मां से, कैसे पहुंची नाजिया (Nazia) केबीसी की हॉटशीट तक और एक मां के ख्वाब को पूरा किया। उनकी बात हुई कोहराम लाइव के इडिटर इन चीफ नीरज ठाकुर से, कैसे पूरा हुआ उनका ख्वाब, इजहार किया अपने पूरे सफर का।

कोहिनूर बन गई Nazia ने सिर्फ इतना ही कहा कि अमिताभ बच्चन मोम के बने हुए हैं। मोम पिघला कर उन्हें बनाया गया है। पता ही नहीं चलता कि वे 80 साल के है। वही स्मार्टनेस, वही चाल-ढाल। गजब के स्मार्ट हैं। उन्हें देख, सुन, मिलकर सालों का ख्वाब पूरा हो गया। यह मन की बात नाजिया ने अपनी मां से शेयर कर बताया।
27 अक्टूबर को मेरे लिए यादगार दिन बन गया। मैं उसे कभी नहीं भूल सकती। नाजिया बेहद खुश है, पूरा परिवार खुशगवार है, सबसे ज्यादा खुश है तो उसकी मां बुशरा नसीम। उसकी खुशी देखने लायक है।
बकौल बुशरा… “मेरा तो ख्वाब पूरा हो गया अमिताभ बच्चन से मिलने का। बचपन से ही ख्वाब पाली थी, एक न एक दिन अमिताभ बच्चन से जरूर मिलूंगी। बचपन से ही उनकी दीवानी हूं, जानते हैं, जब फिल्म कुली की शूटिंग करते समय वो जख्मी हो गए थे, तब मैंने कई जगह दुआ और मन्नतें मांगी थीं, उनकी सलामती के लिए। मेरी दुआ कुबूल हो गई, यह बात मैंने अमिताभ बच्चन को भी बताई, वह खूब हंसे और आज भी अपना जलवा दिखा रहे हैं।”
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जाओ बेटी किस्मत आजमाओ… # Nazia
अमिताभ से मिलने का ख्वाब देखा, फिर सोचा कि कैसे मिल सकती हूं उनसे। ध्यान गया बेटी पर, वह पढ़ने में शुरू से ही बहुत तेज रही, वर्षों पहले की बात है कि किसी से पता चला कि टीवी पर अमिताभ बच्चन केबीसी लेकर आ रहे हैं। मैंने तब से बेटी को प्रेरित किया, जाओ बेटी किस्मत आजमाओ। तब मेरे घर में फोन नहीं था, पड़ोसी के घर जाकर केबीसी को जब भी फोन लगाती थी, फोन इंगेज मिलता था। इस बीच बेटी की 2008 में शादी हो गई और वह चली गई दिल्ली। पर मैं नहीं भूली थी उसे केबीसी में भेजना। मेरा एक ही मकसद था, उसे केबीसी में भेजना।
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एक बार और कोशिश कर लो बेटा

कुछ दिन पहले मैंने उसे फोन कर कहा, बेटी अब ऑनलाइन प्रोसेस हो गया है, केबीसी में जाने का। एक बार और कोशिश कर लो बेटा। बेटी बोली, क्या मां अबतक केबीसी को नहीं भूली हो। मैंने उससे बस इतना कहा कि बेटी बस तू ही मेरा ख्वाब पूरा कर सकती है। इसके बाद वो तन-मन से लग गई। पर जानते हैं, ऑनलाइन प्रोसेस बड़ा ही टफ है। इंटरव्यू, शूटिंग वगैरह वगैरह बहुत मुश्किल है, पर मेरी बेटी कामयाब रही। उसे केबीसी में शामिल होने का

22 अक्टूबर का डेट मिला। मैं 20 अक्टूबर को मुंबई पहुंच गई। मुझे क्वारेंटाइन कर दिया गया। जांच हुई, कोरोना पॉजिटिव आ गया। फिर मैं वापस रांची आ गई। सेकेंड टाइम डेट 27 अक्टूबर को मिला। 28 अक्टूबर को बेटी चूकी नहीं और फतह कर लिया केबीसी का टारगेट। सबसे बड़ा ख्वाब मेरा पूरा हुआ, अमिताभ बच्चन से मिलना। नाजिया ने स्कूली शिक्षा जेवीएम श्यामली से की है और वहीं ग्रैजुएशन संत जेवियर कॉलेज से। वह शुरू से ही बहुत तेज रही है, एक बार जो कुछ भी पढ़ लेती है, उसे नहीं भूलती है। नाजिया का एक दस साल का बेटा है और उसके पति दिल्ली में एक बिजनेसमैन हैं।
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Spelling को लेकर भाई से लग गई थी हजार रुपये की शर्त
एक कहानी आपको सुनाती हूं… एक दिन किसी चैनल में एक शब्द अंगरेजी में गलत लिखा हुआ था, तब मेरी बेटी मेरे भतीजे शादाब से कहा कि यह गलत लिखा हुआ है। शादाब अड़ गया कि नहीं यह सही है। बेटी बोली, चेक कर लो। दोनों में 1000-1000 रुपये की शर्त लग गई। स्पेलिंग चेक की गई, तो बेटी की बात सही निकली और वह जीत गई 1000 रुपये।
दादा मोहम्मद आजम भी हैं बेहद खुश
नाजिया की जीत पर रिश्ते में उनके दादा मोहम्मद आजम भी बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि किसी मां-बाप का ख्वाब बेटा-बेटी ही पूरा कर सकता है।
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