Bihar : मुजफ्फरपुर की विश्व प्रसिद्ध शाही लीची का इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का स्वाद चखेंगे, जिसकी मिठास ने देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। शनिवार को विशेष कोल्ड चेन व्यवस्था के तहत शाही लीची को रेफ्रिजरेटेड वैन से दिल्ली के लिये रवाना किया गया। पूरी प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई है कि फल की ताजगी, मिठास और गुणवत्ता बरकरार रहे। उम्मीद है कि 1 जून तक यह खास खेप राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और गृह मंत्री के निवास तक पहुंच जायेगी।
पतला छिलका, ज्यादा गूदा और लाजवाब मिठास
मुजफ्फरपुर की शाही लीची को खास बनाने वाली उसकी प्राकृतिक विशेषतायें हैं। पतला छिलका, छोटा बीज, भरपूर रस और अद्भुत मिठास इसे देश की सबसे लोकप्रिय लीचियों में शामिल करते हैं। यही वजह है कि हर साल इस फल का इंतजार सिर्फ बाजारों में नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोग भी करते हैं।
वैज्ञानिकों की निगरानी में सालभर होती है खास तैयारी
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक पहुंचने वाली लीची कोई सामान्य खेप नहीं होती। इसके लिये पूरे साल विशेष निगरानी रखी जाती है। लीची अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक बागानों का लगातार निरीक्षण करते हैं। खेत की जुताई से लेकर सिंचाई, खाद, उर्वरक और दवा के छिड़काव तक हर काम वैज्ञानिक सलाह के अनुसार किया जाता है। जब फल पूरी तरह पक जाता है और उसमें शुगर का स्तर निर्धारित मानकों तक पहुंच जाता है, तभी उसकी तुड़ाई की अनुमति दी जाती है।
DM की टीम करती है गुणवत्ता की निगरानी
सीजन शुरू होते ही जिलाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की जाती है। यह टीम चयनित बागानों की निगरानी करती है और सुनिश्चित करती है कि केवल उच्च गुणवत्ता वाली लीची ही VVIP खेप का हिस्सा बने। गुणवत्ता जांच के बाद ही लीची को पैकिंग हाउस भेजा जाता है, जहां उसकी छंटाई, सफाई और विशेष पैकेजिंग की जाती है।
10 साल से एक ही बागान की लीची बन रही पहली पसंद
मुजफ्फरपुर के उद्यमी और बागान मालिक आलोक केडिया के बागानों की शाही लीची पिछले दस वर्षों से लगातार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक पहुंच रही है। मुसहरी, सरैया, मंगरा और ढोली क्षेत्र में फैले उनके बागानों से हर साल सर्वश्रेष्ठ फलों का चयन किया जाता है। आलोक केडिया ने मीडिया को बताया कि गुणवत्ता और स्वाद से कोई समझौता नहीं किया जाता। लीची को तभी तोड़ा जाता है जब वह पूरी तरह तैयार हो जाती है और उसका प्राकृतिक स्वाद अपने सर्वोत्तम स्तर पर पहुंच जाता है।
50 से ज्यादा कारीगर दिन-रात कर रहे पैकिंग
इस बार लीची की विशेष पैकिंग के लिये 50 से अधिक कारीगरों को लगाया गया है। इनमें महिलायें और पुरुष दोनों शामिल हैं। हर फल को सावधानीपूर्वक चुना जा रहा है, ताकि एक भी लीची खराब न हो। विशेष उपहार बॉक्स तैयार किये गये हैं, जिन पर ‘सहप्रेम भेंट’ अंकित किया गया है। पैकिंग ऐसी है कि फल सुरक्षित भी रहे और देखने में आकर्षक भी लगे।
GI टैग ने बढ़ाई दुनिया भर में पहचान
मुजफ्फरपुर की शाही लीची को GI टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मजबूत हुई है। आज यह सिर्फ बिहार की नहीं, बल्कि भारत की कृषि विरासत का एक गौरवशाली प्रतीक बन चुकी है। देश के बड़े शहरों से लेकर विदेशों तक इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक इस लीची का पहुंचना न केवल किसानों के लिए सम्मान की बात है, बल्कि पूरे बिहार के लिये गर्व का क्षण भी है।
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