डर और मन घबराने लगे तो कविता बन जाती है ताकत
RANCHI : किसी शायर ने कहा है, अगर जिंदगी खुदा की रहमत है तो जीना इस कदर दुश्वार क्यों हैं। आओ उसे भी आज शूली पर चढ़ा दें, गरीब है तो खुद्दार क्यों…। जिंदगी से थक-हार और ऊब सा गई थी रिम्स की मेडिकल छात्रा इंदू मनी हेम्ब्रम। तब उसने कविता और साहित्य को चुना। अब इंदू के जीने का सहारा कविता बन गई। साहित्य एक नई ऊर्जा और ताकत दे जाती है। इंदू की कविता का शीर्षक भी आज जिंदगी था। उसकी कविता पर खूब तालियां बजी, वहीं खूब वाहवाही बटोरी। मौका था साहित्य-24 द्वारा हीनू के यूनाइटेड क्लब के बिहारी मंडप में आयोजित POET Convention का।
कविता और साहित्य के प्रति रूचि, लगाव, जुड़ाव और गुमनामी के अंधेरे में खो रहे वरिष्ठ साहित्यकारों को एक नई पहचान देने में जुटे इस मंच की अध्यक्ष डॉ आकांक्षा चौधरी ने कहा- भारत की माटी से जुड़ी सॉफ्टवेयर इंजीनियर दिप्ती चन्द्र की कोशिश है कि साहित्य जिंदा रहे। इसी का नतीजा है कि साहित्य-24 ने स्कूल कॉलेज के नये-नये बच्चों को यह मंच दे सका। साहित्य में रूचि और लगाव रखने वाले दुनियाभर के एनआरआई का मानना है कि कविता और साहित्य है तो देश और घर में जिंदादिली संभव है। पूरे विश्व के एनआरआई को एक धागा में पिरोने का काम दिप्ती चन्द्र कर रही है। आकाशवाणी भारत से जुड़ी दिप्ती आज की तारीख में कैलिफोर्निया में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, पर उनका लगाव साहित्य से कम नहीं हुआ। झारखंड के रांची में साहित्य को लेकर एक मंच देकर उन्होंने राज्य का मान बढ़ाया है।
समारोह में अतिथि की हैसियत से आई अनुराधा सिंह ने कहा, सबसे ज्यादा सुकून तब मिलती है जब नावांकुरों को यह मंच फलक दे जाता है। संत जेवियर्स कॉलेज की छात्रा आस्था का कहना है कि जब मन में डर और घबराहट हो तब खुद की कविता बहुत सुकून दे जाती है। ऋषिकेश लाल कहते हैं, मन की हिचकिचाहट को दूर करने का बड़ा अच्छा तरीका है कविता और साहित्य।
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