kohramlive desk : दिल्ली से केदारनाथ कैसे जाएं, अगर आप भी कुछ इसी तरह के सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, तो इस लेख में जानिए दिल्ली से केदारनाथ ट्रेन, बस और फ्लाइट से पहुंचने के तरीके। केदारनाथ श्रद्धालुओं के लिए हर साल अप्रैल-मई में खोला जाता है और अक्टूबर-नंवबर में इसके कपाट बंद कर दिए जाते हैं। काम-काज के चलते कुछ लोगों के लिए केदारनाथ यात्रा संभव नहीं हो पाती है, लेकिन इस साल दशहरे पर छुट्टियों का ऐसा संयोग बन रहा है कि आप बड़े आराम से बाबा धाम दर्शन के लिए जा सकते हैं। आइए हम आपको बताते है की आप कैसे केदारनाथ यात्रा कर सकते है।
Dussehra Holidays
इस बार 14 अक्टूबर को राम नवमी और 15 को विजय दशमी की छुट्टी है। इसके बाद 16 अक्टूबर को शनिवार और 17 को रविवार है। फिर 19 अक्टूबर को ईद-ए-मिलाद की छुट्टी पड़ेगी। इस बीच अगर आप ऑफिस से 18 अक्टूबर की छुट्टी ले सकें तो 6 दिन की छुट्टियों में केदारनाथ घूमने के लिए जा सकते हैं। आइए अब आपको बताते हैं कि 6 दिन में केदारनाथ यात्रा कैसे संभव है।
Kedarnath Tour Plan
दिल्ली-NCR से बस सर्विस के जरिए केदारनाथ पहुंच सकते हैं और इसके लिए आपको बहुत ज्यादा रुपए भी नहीं खर्च करने पड़ेंगे। लेकिन केदारनाथ रवाना होने की तैयारी आपको आज से ही करनी पडे़गी।
Kedarnath Bus Route
दिल्ली से केदारनाथ जाने के लिए आपको सबसे पहले कश्मीरी गेट अंतर्राज्यीय बस अड्डे से बस लेकर हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचना होगा। इसका किराया करीब साढ़े 300 रुपए है। दिल्ली से ऋषिकेश के लिए कई प्राइवेट बसें भी चलती हैं लेकिन इनका किराया थोड़ा ज्यादा हो सकता है। दिल्ली से हरिद्वार की दूरी करीब 206 किलोमीटर है और ऋषिकेश पहुंचने के लिए आपको 24 किलोमीटर आगे जाना होगा।
ऋषिकेश पहुंचने के बाद आपको सोनप्रयाग तक पहुंचना होगा। इसके लिए आपको ऋषिकेश से बिल्कुल सुबह ही बस पकड़नी होगी। शाम तक आप सोनप्रयाग पहुंच जाएंगे जहां से आपको गौरीकुंड के लिए शेयरिंग टैक्सी का सस्ता विकल्प (20 रुपये) मिल जाएगा।
गौरीकुंड ही केदारनाथ का निकटतम स्थल है। मोटर-गाड़ी के जरिए आप सिर्फ गौरीकुंड तक ही पहुंच सकते हैं। इसके बाद आपको पदयात्रा करके ही केदारनाथ बाबा के धाम पहुंचना होगा। गौरीकुंड से केदारनाथ का यह ट्रेक करीब 16-18 किलोमीटर लंबा है। 18 किमी का ट्रेक आप कितने घंटे में पूरा कर पाते हैं, ये आपकी फिटनेस और स्पीड पर निर्भर करता है। हालांकि, ट्रेक का रास्ता बहुत सीधा है और आप खुद बिना किसी गाइड के ये यात्रा कर सकते हैं।अगर आपकी चलने की स्पीड और फिटनेस अच्छी है तो 6.30-7 घंटे में केदारनाथ मंदिर तक का ट्रेक पूरा कर सकते हैं। लौटते वक्त भी आपको यही ट्रेक और रूट फॉलो करना होगा।
दिल्ली से हरिद्वार 206 किमी -> हरिद्वार से ऋषिकेश 24 किमी -> ऋषिकेश से देवप्रयाग 74 किमी -> देवप्रयाग से श्रीनगर 34 किमी -> श्रीनगर से रुद्रप्रयाग 33 किमी -> रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड (तिलवाड़ा-अगस्तमुनि-चंद्रपुरी-कुंड-गुप्तकाशी- फाटा-सीतापुर-सोनप्रयाग के माध्यम से) 74 किमी -> गौरीकुंड से केदारनाथ (ट्रैक द्वारा) 14 किमी
Kedarnath Rail Route
केदारनाथ जाने वालों के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है जो कि NH58 पर केदारनाथ से करीब 216 किलोमीटर पहले पड़ेगा। इसके बाद आपको शेयर कैब, टैक्सी या बस लेकर गौरीकुंड पहुंचना पड़ेगा। गौरीकुंड से 18 घंटे की पैदल यात्रा कर आप केदारनाथ पहुंच सकते हैं।
Kedarnath Helicopter Service
वैसे तो ज्यादातर यात्री पैदल यात्रा करके ही केदारनाथ धाम पहुंचते हैं, लेकिन आप चाहें तो ट्रेकिंग की बजाय हेलीकॉप्टर के जरिए भी पहुंच सकते हैं। यह सुविधा गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा जैसे कई हेलीपैड पर उपलब्ध है। यहां पवन हंस, पिनैकल एयर, आर्यन एविएशन और हिमालयन एयर सर्विस जैसी कई कंपनियां हेलीकॉप्टर राइड की सुविधाएं देती हैं, जिनका वन-वे किराया करीब 2,300 रुपए होता है और राउंड ट्रिप के लिए करीब 4,700 रुपए खर्च करने पड़ेंगे।
Kedarnath E-Pass
उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब चार धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को देवस्थानम बोर्ड की वेबसाइट से ई-पास लेने की जरूरत नहीं है। श्रद्धालुओं की निर्धारित संख्या की बाध्यता भी खत्म हो चुकी है. हालांकि यात्रियों को कोविड गाइडलाइन्स का पालन करना होगा और smartcitydehradun.uk.gov.in पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।
Best time to visit Kedarnath
अप्रैल में यात्रा शुरू होने के बाद मॉनसून से पहले और मॉनसून खत्म होने के बाद यात्रा समापन तक केदारनाथ जाने के लिए आदर्श समय माना जाता है। केदारनाथ का मौसम लगभग पूरे साल ठंडा रहता है और यहां जाने के लिए मई, जून, सितंबर, अक्टूबर सबसे सही समय माना जाता है।
What to do in Kedarnath
केदारनाथ भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां भगवान शिव का मंदिर गिरीराज हिमालय की केदार नाम की चोटी पर स्थित है जो कि उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है। केदारनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। ये जगह हिंदू धर्म की पौराणिक मान्याताओं की वजह से आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
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