Kohramlive : महाकुंभ (Mahakumbh 2025) में चारों तरफ साधु-संन्यासी का हुजूम है। साधु-संत आखिरकार भगवा रंग के ही कपड़े क्यों पहनते हैं? इसके पीछे की कहानी रोचक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवा रंग अग्नि का प्रतीक है। इसे पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक भी माना जाता है। इस रंग को ऊर्जा और त्याग का प्रतीक भी माना जाता है। साधु-संतों का मानना है कि इस रंग को धारण करने से मन वश में रहता है। वहीं, दिमाग शांत रहता है। पौराणिक कहानी के अनुसार साधु संत पुराने समय में एक जगह से दूसरे जगह जब जाते थे तो अपने साथ अग्नि लेकर जाते थे। धीरे-धीरे वह भगवा रंग का ध्वज लेकर जाने लगे और बाद में यही वस्त्रो में बदल गया।
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