गढ़वा जेल में बंदियों को बताया गया बच्चों का कानूनी हक…

Date:

spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Garhwa(Nityanand Dubey) :  जेल की ऊंची दीवारों और लोहे की सलाखों के पीछे बंद कैदियों के मन में सबसे बड़ी चिंता अक्सर अपने बच्चों के भविष्य को लेकर होती है। कहीं पढ़ाई न छूट जाये, कहीं बच्चों को सहारा न मिले, कहीं उनका भविष्य अंधेरे में न चला जाये। इन्हीं चिंताओं को समझते हुये गढ़वा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) ने एक जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार (NALSA) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) के 90 दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम के तहत स्थानीय उपकारा (जेल) में बंदियों के लिये ‘चाइल्ड फ्रेंडली लीगल फॉर चिल्ड्रन’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

बच्चों के अधिकारों पर हुई खुली चर्चा

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार मनोज प्रसाद के आदेश तथा सचिव निभा रंजना लकड़ा के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों को उनके बच्चों के अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों और उपलब्ध कानूनी सहायता की जानकारी देना था। कार्यक्रम के दौरान LADC प्रविंद कुमार साहू ने बंदियों से सीधे संवाद करते हुये कहा कि माता-पिता के जेल में होने का असर बच्चों के विकास और शिक्षा पर नहीं पड़ना चाहिये। समाज और कानून दोनों की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण और अवसर मिलते रहें।

जरूरत पड़ी तो मुफ्त मिलेगा वकील

एलएडीसी नित्यानंद दुबे ने बंदियों को बताया कि यदि उनके बच्चों को किसी प्रकार की कानूनी समस्या, अभिरक्षा (कस्टडी) विवाद, शिक्षा संबंधी परेशानी या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो रही है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकार उनकी मदद करेगा। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता और वकील उपलब्ध कराया जायेगा।

सरल भाषा में समझाया गया किशोर न्याय अधिनियम

कार्यक्रम में किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) की महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं। बंदियों को बताया गया कि बच्चों से जुड़े मामलों में कानून बेहद संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाता है और उनके हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये वक्ताओं ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में माता-पिता द्वारा किये गये कार्यों का दुष्प्रभाव बच्चों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिये। उन्होंने कहा,किसी भी परिस्थिति में माता-पिता के किये की सजा बच्चों को नहीं मिलनी चाहिये। समाज और कानून का यह दायित्व है कि ऐसे बच्चों को सुरक्षित माहौल, अच्छी शिक्षा और सही मार्गदर्शन मिले, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें। 

मुलाकातियों के लिये भी शुरू हुई कानूनी सहायता

PLV दीपक कुमार रवी ने बंदियों को जानकारी दी कि जेल के मुलाकात क्षेत्र में लीगल एड हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है। यहां मुलाकात के लिये आने वाले परिजनों को भी कानूनी सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जायेगी।इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को न्यायिक सहायता तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में खुला प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान कई बंदियों ने अपने बच्चों की पढ़ाई, देखभाल, अभिरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल पूछे। मौके पर मौजूद विधिक सेवा प्राधिकार के अधिवक्ताओं ने सभी प्रश्नों के जवाब दिये और जिन मामलों में आगे कार्रवाई की जरूरत थी, उनके आवेदन भी दर्ज किये गये। जेल प्रशासन ने के अधिकारियों ने कहा कि इस इस तरह की पहल बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़े रहने का एहसास भी कराती है।

इसे भी पढ़ें : खोये मोबाइल पाकर कई परिवारों के खिल उठे चेहरे…

इसे भी पढ़ें : बुजुर्ग की हाजत में बीती रात, 10 हजार लेकर छोड़ने का इल्जाम…

इसे भी पढ़ें : राहुल सिंह गैंग के 4 शू’टर धरा गये…

इसे भी पढ़ें : सूर्या का ‘का’तिल’ पुलिस मु’ठभेड़ में ढे’र…

इसे भी पढ़ें : चुराया सोना निकला नकली, चोरों का टूटा दिल, एक चूक से चला गया अंदर…

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

पहली पत्नी रहते रचाई दूसरी शादी, पहुंचा जेल…

Hazaribagh : रिश्तों में भरोसा सबसे बड़ी पूंजी माना जाता...

चंद्रवंशी समाज ने होनहार बच्चों को किया सम्मानित…

Hazaribagh : अखिल भारतीय चंद्रवंशी क्षत्रिय समाज, चौपारण इकाई...

खोये मोबाइल पाकर कई परिवारों के खिल उठे चेहरे…

Hazaribagh(Sunil Sahu) : बातचीत, लोगों की यादों, जरूरी दस्तावेजों और...

बुजुर्ग की हाजत में बीती रात, 10 हजार लेकर छोड़ने का इल्जाम…

Garhwa : तपती गर्मी, सूखे हलक और पानी की तलाश...