कोहरामलाइव डेस्क : गाली असभ्यता और अशिष्टता की परिचायिका है। यह असामाजिकता भी है और स्वाभाव की गंदगी तो कहीं ही जाती है। इसकी कुछ सकारात्मकता भी हो सकती है, ऐसा कैसे हो सकता है। यह देखने में आता है कि हमारे आस-पास कई सारे ऐसे लोग होते हैं, जो बात-बात पर गालियां निकालते हैं। गाली निकालने वाले को हम हमेशा गंदा ही समझते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि गाली निकालने से दिमाग स्वस्थ भी रहता है। यह बात अजीब लगती है, पर मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से इसमें सच्चाई है।
गालियां दूर करती हैं फ्रस्ट्रेशन
यदि आपके ना चाहते हुए भी मुंह से गाली निकल जाती है और आपको कोई शर्मिंदगी भी नहीं होती, तो इसका मतलब यह है कि आपका दिमाग कई तरह के फ्रस्ट्रेशन को दूर कर देता है। हम कई गालियों को जाने-अनजाने देते रहते हैं। ना चाहते हुए भी कुछ गालियां मुंह से निकलती रहती हैं। ऐसी गालियों के नाम बताने की जरूरत नहीं है।
होता है चैन और सुकून का एहसास
कई बार हम अपने दोस्तों के सामने भी गाली निकाल देते हैं। इससे दोस्त नाराज भी हो जाते हैं। फिर भी हम अक्सर देखते हैं कि मुंह से गालियां निकालने के बाद हमें कुछ सुकून और चैन जैसा महसूस होता है। इससे हम रिलेक्स फील करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि दिल का बोझ हल्का हो गया है। और दिमाग टेंशन से मुक्त हो जाता है।
खुशी के इजहार में भी निकल जाती है गाली
जब हम बचपन में गलती से किसी को गाली दे देते थे. तो मां-पापा हमारी जमकर पिटाई करते थे। तब किसी को साला और बे बोल देना भी गाली के बराबर होता था। आज वक्त बदल गया है और हम कई तरह की गालियों का खुलेआम इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि कई बार हम ख़ुशी का इजहार करते समय भी अपने दोस्तों को गालियां दे देते हैं।
गाली देकर कम हो जाता है गुस्सा
कई बार हम एंगर यानी क्रोध में गाली दे देते हैं। अब साइंस ने भी प्रूव कर दिया है कि गाली देने से हम कुछ हद तक अपने गुस्से को कम कर पाते हैं। इससे हमारा दिमाग तरोताजा हो जाता है। हाल में कीन यूनिवर्सिटी में एक स्टडी में यह बात सामने आई थी कि गाली देने से हमारे दिल को सुकून मिलता है।
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