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होर्मुज बंद, दुनिया की धड़कन तेज…

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Kohramlive : अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर लगातार हमलों के बीच युद्ध छठे दिन और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि मिडिल ईस्ट से उठी जंग की लपटें अब हिंद महासागर तक महसूस की जा रही हैं। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी गई। यही वह रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस हासिल करता है। ईरानी स्टेट मीडिया के मुताबिक युद्ध के शुरुआती दिनों में ही भारी नुकसान हुआ है। 1,045 लोगों की मौत हो गई। 5,990 से ज्यादा घायल हो गये। 33 नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमले किये गये। इनमें अस्पताल, स्कूल, Grand Bazaar और ऐतिहासिक Golestan Palace जैसे स्थान भी निशाने पर आये हैं। उधर उत्तर-पश्चिमी ईरान में कुर्दिश-ईरानी सशस्त्र समूहों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे हालात और जटिल हो गये हैं। ईरान की सत्ता में भी हलचल तेज हो गई है। दिवंगत सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के बेटे Mojtaba Khamenei को अब अगला सर्वोच्च नेता बनने का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। बताया जाता है कि उनके संबंध ईरान की ताकतवर सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से बेहद गहरे हैं। खबर है कि हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने IRIS Dena नाम के ईरानी युद्धपोत को टारपीडो से डुबो दिया। इस हमले के बाद 89 शव बरामद होने की खबर है।

दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर संकट खड़ा हो गया है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं, दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20% एवं वैश्विक LNG व्यापार का करीब 19% इसी रास्ते से गुजरता है। वित्तीय संस्था Goldman Sachs की रिपोर्ट कहती है कि तेल बाजार में पहले ही 18 डॉलर प्रति बैरल का जोखिम प्रीमियम जुड़ चुका है। अगर यह रास्ता एक महीने बंद रहा तो ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका लग सकता है। इसका सीधा असर भारत समेत एशिया के बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। इस बीच इस्राइली सेना ने कहा है कि तेहरान के सैन्य ढांचे पर हमलों की नई लहर जारी रहेगी। व्हाइट हाउस का दावा है कि उनका लक्ष्य ईरान की नौसैनिक और परमाणु क्षमता को खत्म करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि अगर यह हमला नहीं होता तो ईरान दो हफ्तों में परमाणु हथियार हासिल कर सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट अब सिर्फ युद्ध नहीं रहा। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा तो तेल से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक की कीमतें दुनिया भर में उछल सकती हैं।

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