Kohramlive Desk : सिर पर बाल न हों तो आप गंजे कहे जाएंगे। बालों को आप अलग-अलग स्टाइल में रख सकते हैं। इससे आपकी पर्सनालिटी का इंप्रेशन पता चलता है। सामान्य रूप से भारत के लोगों के बाल काले होते हैं। विदेशी नागरिकों के बाल के रंग भूरे या गोल्डन कलर के होते हैं। अब अगर हम सोचें कि भारत के लोगों के बाल काले ही क्यों होते हैं तो इसका सबसे महत्वपूर्ण आधार शरीर विज्ञान से पता चलता है। चिकित्सा विज्ञान के जानकार बताते हैं कि शरीर में मेलानिन (Melanin) नामक जैव रासायनिक पदार्थ पैदा होता है। इसी की वजह से बालों का रंग काला होता है। जैसे-जैसे इसकी मात्रा कम होती जाती है, इंसान के बाल सफ़ेद होने लगते हैं। इंसान की बॉडी में मेलानिन की मात्रा सबसे ज्यादा बालों में पाई जाती है। इसी वजह से इनका रंग इतना डार्क काला होता है।
उम्र के साथ बदलता है बालों का रंग
उम्र के साथ जैसे-जैसे मेलानिन की मात्रा कम होती है, सिर के बालों का रंग सफ़ेद होता जाता है। अगर बॉडी में मेलानिन है लेकिन नॉर्मल से कम है तो बालों का कलर भूरा या गोल्डन हो जाता है। इसकी मात्रा जियोग्राफिक इन्वायरमेंट पर भी निर्भर करता है। इसी वजह से कई देशों में बच्चों के बाल गोल्डन होते हैं। वहां का वातावरण ऐसा होता है कि बच्चों की बॉडी में मेलानिन भारतीय बच्चों के मुकाबले कम होता है। इसी कारण इनके बाल काले नहीं होते।
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