रांची : झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती का 64 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। सजल चक्रवर्ती बेंगलुरु इलाज कराने गए थे, वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। कोलकाता में रवींद्र नाथ टैगोर हॉस्पिटल के डॉ ललित कपूर ने ऑपरेशन थियेटर में ले जाने के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए ऑपरेशन करने से मना कर दिया। इसके बाद सजल चक्रवर्ती कोलकाता से रांची लौट आये थे। तकलीफ ज्यादा बढ़ गयी, तो वह बेंगलुरु चले गये। वहां नारायण हृदयालय में उनका इलाज शुरू हुआ। गुरुवार को उनका ऑपरेशन किया गया। सजल चक्रवर्ती का ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन बाद में दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। शुक्रवार को उनका शव बेंगलुरु से रांची लाया जायेगा।
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बता दें कि सजल चक्रवर्ती के न बच्चे हैं, न ही परिवार का कोई अन्य सदस्य जीवित है। उनके अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था सरकार ही करेगी। सजल चक्रवती का जन्म रांची में 19 मार्च 1956 में हुआ था। 1980 में राज्य में IAS के रूप में उन्होंने पद्भार ग्रहण किया था। 30 मई 2014 से 30 दिसबंर 2016 तक वो झारखंड के मुख्य सचिव रहे थे। 2016 में वो आईएएस से रिटायर हुए थे। सजल चक्रवर्ती एक जिंदादिल इंसान थे। वे आमलोगों के काफी करीब थे। सजल चक्रवर्ती हमेशा सुर्खियों में रहते थे। मुख्य सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने देर रात थानों और अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर खलबली मचा दी थी। बता दें कि सजल चक्रवर्ती झारखंड के मुख्य सचिव के अलावे कई विभागों में भी रह चुके हैं। चारा घोटाला मामले में भी दोषी करार दिए गये थे।
जहां दफन हुए भोलू और शिल्पी, वहीं होगा अंतिम संस्कार
सचिव सजल चक्रवर्ती को जीव-जंतुओं से बहुत प्यार था। वे कुत्ते, बिल्ली और बहुत सारे बंदर पाल रखे थे। बंदर से उन्हें खास लगाव था। हाल ही में उनके प्रिय बंदर भोलू और बंदरिया शिल्पी की मौत हो गयी। दोनों रांची के घाघरा में दफन किया गया। सजल ने अपने करीबी लोगों से कहा था कि जब वह मरेंगे, तो उनका अंतिम संस्कार इनके बगल में ही किया जाये। अब जबकि सजल चक्रवर्ती इस दुनिया में नहीं है, उनकी इच्छा के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार घाघरा में उसी जगह किया जायेगा, जहां उनके प्रिय बंदर-बंदरिया भोलू और शिल्पी को दफन किया गया था। सजल चक्रवर्ती जब भी फुर्सत में रहते थे, भोलू और शिल्पी को अपने साथ रखते थे। दोनों सजल के दोनों कंधे पर बैठे रहते थे।
अच्छे इंसान के साथ-साथ अच्छे पायलट भी थे सजल
सजल चक्रवर्ती अच्छा इंसान होने के साथ-साथ एक अच्छे पायलट भी थे। श्री चक्रवर्ती जीव-जंतुओं से बेहद प्यार करते थे। कभी बंदर को लेकर घूमते रहते थे तो कभी कुत्ते को प्यार करने नजर आते थे। सरल स्वभाव के श्री चक्रवर्ती 2010 में जब झारखंड के एक बीडीओ का नक्सलियों ने अपहरण कर लिया, तो उन्हें छुड़ाने के लिए सजल चक्रवर्ती अकेले डुमरिया की ओर चल दिये थे। मगर पुलिस बल ने उन्हें जंगल में जाने से रोक दिया था।
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