Kohramlive : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के लोगों ने खौफ में रातें काटी। रतजगा कर रहे लोगों को हो रही जोरदार बारिश ने डरा रखा है। बीच-बीच में बादल गरजते और बिजली भी चमकती रही। ऐसी बारिश 122 साल बाद देखने को मिली है। खबर है कि मंगलवार की रात से शुरू हुई झमाझम बारिश बुधवार तक होती रही। कई घरों के आंगन तक में पानी ही पानी जमा हो गया। सड़कों पर आवाजाही की रफ्तार धीमी पड़ गई। गाड़ियों का चलना बंद हो गया। लोग पैदल ही निकलना मुनासिब समझे। तेज हवा के झोंके में पेड़ गिरने और जमीन धंसने के डर से लोग रतजगा करते रहे। रातभर बादल झमाझम बरसे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले साल 1901 में ऐसी बारिश हुई थी। गुजरे 24 घंटों में करीब 229 मिलीमीटर बारिश हुई। साल 2019 में 153 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड दर्ज की गई थी। जिनके घर कमजोर थे, उस घर के लोग अपने-अपने घरों से बाहर तक आ गये। बुधवार को सोलन में 45, मंडी में 42, नाहन में 92, भुंतर में 28, धौलाकुआं में 48, कांगड़ा में 7 और धर्मशाला में 18 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। स्थानीय जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया। बारिश से हुये नुकसान का जायजा लिया जा रहा है।
इस बीच खबर है कि हिमाचल में भारी बारिश से भूस्खलन के चलते 7 लोगों की जान चली गई। वहीं राज्य के 12 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया।
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