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घबराएं नहीं,  मुमकिन है सफेद दाग का इलाज

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कोहराम लाइव डेस्क : Vitiligo (ल्यूकोडर्मा) यानी सफेद दाग एक प्रकार की त्वचा की बीमारी है। वर्ल्‍ड की लगभग 0.5 से 1 फीसदी आबादी Vitiligo से प्रभावित है। इंडिया में इससे प्रभावित लोगों की आबादी लगभग 8.8 प्रतिशत तक है। आज के समय में इसका इलाज आसान है, इसलिए घबराएं नहीं।

किसी भी उम्र में हो सकती है यह बीमारी

देश में इस बीमारी को समाज में कलंक के रूप में भी देखा जाता है। Vitiligo किसी भी उम्र में शुरू हो सकता है, लेकिन विटिलिगो के आधा से ज्यादा मामलों में यह 20 साल की उम्र से पहले ही विकसित हो जाता है, वहीं 95 प्रतिशत मामलों में 40 वर्ष से पहले ही विकसित होता है।

मिथको भी समझें

दुनियाभर में त्वचा त्वचा विशेषज्ञों का दूसरा सबसे बड़ा एसोसिएशन एवं देश के डर्मेटोलाजिस्ट का सबसे बड़ा आधिकारिक संगठन इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्टस, वेनेरियोलोजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (आई.ए.डी.वी.एल) ने 22 जून को ‘World Vitiligo Day’ के मौके पर विटिलिगो के उपचार विकल्पों, इससे जुड़े तथ्यों व मिथकों पर प्रकाश डाला।

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बीमारी का क्रम परिवर्तनीय

Vitiligo एक प्रकार का त्वचा विकार है, जिसे सामान्यत: ल्यूकोडर्मा के नाम से जाना जाता है। इसमें आपके शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। इस बीमारी का क्रम बेहद परिवर्तनीय है। कुछ रोगियों में घाव स्थिर रहता है, बहुत ही धीरे-धीरे बढ़ता है, जबकि कुछ मामलों में यह रोग बहुत ही तेजी से बढ़ता है और कुछ ही महीनों में पूरे शरीर को ढक लेता है। वही कुछ मामलों में, त्वचा के रंग में खुद ब खुद पुननिर्माण भी देखा गया है।

मेलेनोसाइट्स के मरने से शुरू होती है बीमारी

जब आपके शरीर में मेलेनोसाइट्स मरने लगते हैं, तब इससे आपकी त्वचा पर कई सफेद धब्बे बनने शुरू होते हैं। इस स्थिति को सफेद कुष्ठ रोग भी कहा जाता है। यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों जो कि सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आते हैं, चेहरे, हाथों और कलाई के क्षेत्र इससे ज्यादा प्रभावित होते है। समाज में विटिलिगो से जुड़े कई मिथकों के कारण प्रभावित लोगों को अक्सर सामाजिक बहिष्कार का सामना भी करना पड़ता हैं। Vitiligo व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं करता है। इसे लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। सामान्य विटिलिगो एक प्रगतिशील बीमारी है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे जीवनकाल में इसकी स्थिरता व फैलाव का चक्र काफी हद तक अप्रत्याशित होता है लेकिन विटिलिगो किसी भी तरह से संक्रामक नहीं है।

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अनुवांशिक कारण भी

Vitiligo के होने का सटीक कारण को अभी तक पहचाना नहीं जा सका है, हालांकि यह आनुवांशिक एवं पर्यावरणीय कारकों के संयोजन का परिणाम प्रतीत होता है। कुछ लोगों ने सनबर्न या भावनात्मक तनाव जैसे कारकों को भी इसके लिए जिम्मेवार बताया है। आनुवंशिकता Vitiligo का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है, क्योंकि कुछ परिवारों में Vitiligo को बढ़ते हुये देखा गया है। Vitiligo के इलाज के लिए, टोपिकल, विभिन्न सर्जरी, लेजर चिकित्सा एवं अन्य वैकल्पिक उपचार उपलब्ध हैं। चिकित्सक रश्मि बताती है कि करीब 30 प्रतिशत मामलों में प्रभावित व्यक्ति का Vitiligo का परिवारिक इतिहास (जैसे चाची, चाचा, चचेरे भाई, दादाजी) होने का पता चलता है।

मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक प्रभाव

Vitiligo से प्रभावित व्यक्तियों के बच्चों में विटिलिगो विकसित होने का खतरा लगभग 5 प्रतिशत माना जाता है। हालांकि, यह स्थिति आमतौर पर शारीरिक रूप से दर्दनाक नहीं होती है। इसके मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक प्रभाव ज्यादा दिखाई देते है। यह विशेष रूप से बच्चों और गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

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