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Friday, August 19, 2022
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होलिका दहन में भूलकर भी न जलाए इन पेड़ों की लकड़ियां

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Kohram live desk : होली के एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाता है। आज के दिन भूलकर भी इन पेड़ों की लकड़ियां को नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो हर पेड़ पर किसी न किसी देवता का आधिपत्य होता है और पेड़ों में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। यही कारण है कि अलग-अलग तीज-त्योहारों में अलग-अलग पेड़ों की पूजा करने का विधि-विधान हमारे शास्त्रों में बताया गया है। और बुजुर्गों से भी सुनने को मिलता है। बरगद के पेड़ से लेकर पीपल का पेड़, शमी का पेड़, आम का पेड़, आंवले का पेड़, नीम का पेड़, केला का पेड़, अशोक का पेड़, बेलपत्र का पेड़- इन सभी की पूजा की जाती है।  इसलिए होलिका दहन के मौके पर हरे पेड़ की लकड़ियों को भूलकर भी नहीं जलाना चाहिए।

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किन पेड़ों की लकड़ियां को जला सकते है

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होलिका दहन के मौके पर कुछ चुने हुए पेड़ों की ही लकड़ियों को ही जलाने की सलाह दी जाती है। वे पेड़ हैं- एरंड और गूलर । वैसे तो गूलर का पेड़ अत्यंत शुभ माना गया है लेकिन चूंकि इस मौसम में गूलर और एरंड इन दोनों ही पेड़ों के पत्ते झड़ने लगते हैं और अगर इन्हें जलाया न जाए तो इनमें कीड़े लगने लगते हैं।

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उपले और कंडे का इस्तेमाल करें दहन के समय

होलिका दहन के लिए गाय के गोबर से बने उपले और कंडों का विकल्प अच्छा है। इसके अलावा खर-पतवार को भी होलिका की आग में जलाना चाहिए। ऐसा करने से बड़ी तादाद में हरे पेड़ और लकड़ियों को बचाया जा सकता है। होलिका दहन इसीलिए किया जाता है क्योंकि यह बुराई के अंत का प्रतीक है।

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नोट : साभार

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